बीकानेर देश में गुणवत्तापूर्ण मूंगफली उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके बावजूद किसानों और उद्यमियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रोसेसिंग इकाइयों के अभाव में यहां की मूंगफली कच्चे रूप में ही देश-विदेश भेजी जा रही है।
बीकानेर। बीकानेर प्रदेश देश में गुणवत्तापूर्ण मूंगफली उत्पादन के लिए सिरमौर माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहां के किसानों से लेकर उद्यमियों तक को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। सालाना करीब एक करोड़ बोरी मूंगफली बीकानेर की मंडियों से ट्रकों में भरकर देशभर में और विदेशों तक भेजी जाती है।
गिनी-चुनी ऑयल मिलों को छोड़ दें तो बीकानेर में मूंगफली फूड प्रोसेसिंग की इकाइयां लगभग नहीं हैं। मूंगफली का छिलका हटाकर उसके गोटे से खाद्य उत्पाद बनाने, तेल निकालने, पशु आहार तैयार करने सहित कई तरह के उद्योग यहां पनप सकते हैं, लेकिन सरकारी अनदेखी के चलते यह कार्य अन्य राज्यों में हो रहा है।
प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने का सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि उन्हें मूंगफली के पूरे दाम नहीं मिल पाते। स्थानीय खरीदार कम होने से माल मंडियों में कई दिनों तक पड़ा रहता है। वहीं, प्रोसेसिंग यूनिट्स से पैदा होने वाले रोजगार और श्रमिकों से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
गुजरात में इस बार बेमौसम बरसात के कारण वहां की मूंगफली की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, देश में बीकानेर की मूंगफली की गुणवत्ता की मांग बढ़ी है। अकेली बीकानेर अनाज मंडी में इस सीजन में सवा करोड़ बोरी मूंगफली का कारोबार होने का अनुमान है। इसमें से करीब 60 लाख बोरी मूंगफली गुजरात सहित अन्य राज्यों में निर्यात हो चुकी है। पूरे प्रदेश में इस सीजन में सवा करोड़ बोरी मूंगफली के निर्यात का अनुमान है।
बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 150 तेल मिलों में मूंगफली से तेल निकाला जाता है। हालांकि तेल के अलावा फूड प्रोडक्ट प्रोसेसिंग की यूनिट्स नहीं हैं। ऐसे में मिलों से निकले तेल का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा बाहर भेज दिया जाता है। सालाना करीब 30 लाख बोरी मूंगफली से तेल का उत्पादन होता है, जबकि शेष मूंगफली अन्य राज्यों की ऑयल मिलों में चली जाती है। तेल निकालने के बाद पशु आहार के रूप में खल भी तैयार की जाती है।
बीकानेर से मूंगफली का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। बाहर के व्यापारियों की नजर यहां की उच्च गुणवत्ता वाली मूंगफली पर रहती है। प्रतिदिन करीब 200 टन मूंगफली तेल का निर्यात किया जा रहा है, जो पिछले चार-पांच माह से लगातार हो रहा है। गुजरात में बरसात से मूंगफली की फसल खराब होने के कारण इस बार तेल और मूंगफली की मांग बढ़ गई है।