
Police Officers Warning: पुलिसिंग अब केवल अपराध दर्ज करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहेगी। विवेचना के दौरान साक्ष्य जुटाने, उसे सुरक्षित रखने, ई-साक्ष्य तैयार करने, सीसीटीएनएस पर रिकॉर्ड अपडेट करने और तय समय-सीमा में चालान न्यायालय में पेश करने में लापरवाही भी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के मूल्यांकन का आधार बन रही है।
इसी कड़ी में एसएसपी रजनेश सिंह ने लापरवाही बरतने पर डेढ़ दर्जन थाना प्रभारियों को चेतावनी वाली सजा दी है। वहीं बेहतर काम करने वालों की सेवा पुस्तिका में प्रशंसा दर्ज करने के साथ 10 पुलिसकर्मियों को नगद पुरस्कार भी दिया गया है।
नवीन आपराधिक कानून के तहत निर्धारित 60 और 90 दिन की समय-सीमा में अभियोग पत्र न्यायालय में पेश नहीं करने पर एसएसपी रजनेश सिंह ने कई थाना प्रभारियों को चेतावनी दी गई है। इनमें तोपसिंह नवरंग (बिल्हा), राजेश मिश्रा (सीपत), कृष्णचंद्र सिदार (मस्तूरी), अवनीश पासवान (तखतपुर), देवेश सिंह राठौर (सिटी कोतवाली), विवेक पाण्डेय (कोनी), किशोर कैंवट (सिविल लाइन), उमेश साहू (सकरी), भावेश शेण्डे (चकरभाठा), रविन्द्र अनंत (तारबाहर), कमला एसाम (पचपेड़ी), दामोदर मिश्रा (हिर्री), निलेश पाण्डेय (रतनपुर), मानकुंवर सिदार (महिला थाना), उत्तम साहू (अजाक), रजनीश सिंह (तोरवा), वाय.पी. सिंह (सिरगिट्टी) और प्रसाद सिन्हा (रेंज साइबर थाना) शामिल हैं।
वहीं, ई-साक्ष्य तैयार करने में लापरवाही पर भी यशवंत प्रताप सिंह, रजनीश सिंह, निलेश पाण्डेय, कृष्णचंद्र सिदार, उमेश साहू, किशोर केवट, प्रदीप आर्य और रविन्द्र अनंत को भविष्य के लिए चेतावनी दी गई है।
एफआईआर और चार्जशीट को सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने में लापरवाही को भी विभाग ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में टीआई उत्तम साहू (अजाक), भावेश शेण्डे (चकरभाठा), देवेश सिंह राठौर (सिटी कोतवाली), किशोर केंवट (सिविल लाइन), विवेक पाण्डेय (कोनी), निलेश पाण्डेय (रतनपुर), रविन्द्र अनंत (तारबाहर), रजनीश सिंह (तोरवा), ओमप्रकाश कुर्रे (मोपका) और बीएन वनाफर (बेलगहना) को चेतावनी दी गई है।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि पुलिसिंग का मूल्यांकन केवल गिरफ्तारी और प्रकरण दर्ज करने तक सीमित नहीं है। विवेचना में साक्ष्य की गुणवत्ता, ई-साक्ष्य का सही संधारण, आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी करना और निर्धारित समय-सीमा में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बेहतर परिणाम देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा।
वहीं प्रक्रियागत लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी भी तय होगी। पुलिस का प्रयास ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें कार्रवाई के साथ विवेचना की गुणवत्ता और न्यायालयीन परिणाम पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों को भी प्रोत्साहित किया गया है। 60 और 90 दिनों की निर्धारित समय-सीमा में बेहतर तरीके से अभियोग पत्र पेश करने वाले निरीक्षक मानकुंवर सिदार (महिला थाना), प्रदीप आर्य (सरकंडा), दामोदर मिश्रा (हिर्री), वाय.पी. सिंह (सिरगिट्टी), निलेश पाण्डेय (रतनपुर) और रजनीश सिंह (तोरवा) के नाम सेवा पुस्तिका में प्रशंसा के लिए दर्ज किए गए हैं। बेहतर ई-साक्ष्य तैयार करने के लिए राजेश मिश्रा (सीपत), दामोदर मिश्रा (हिर्री), भावेश शेण्डे (चकरभाठा), कमला एसाम (पचपेड़ी) और विवेक पाण्डेय (कोनी) के कार्य की भी प्रशंसा की गई है।
ई-साक्ष्य तैयार करने, एसआईजीडी जनरेट करने और उसे अपराध से लिंक करने में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 10 पुलिसकर्मियों को 500-500 रुपए का नगद पुरस्कार दिया गया है। इनमें उप निरीक्षक गणेशराम महिलांगे (सकरी), उप निरीक्षक मीना ठाकुर (कोटा), उप निरीक्षक संतोषी अग्रवाल (सिरगिट्टी), एएसआई धर्मेंद्र यादव (सीपत), एएसआई भरत सिंह मरकाम (सीपत), एएसआई कमलफूल साहू (सीपत), आरक्षक मुनेश्वर मरावी (सरकंडा), आरक्षक सत्यप्रकाश यादव (कोटा), आरक्षक जयपाल बंजारे (तखतपुर) और आरक्षक संगीता नेताम (सरकंडा) शामिल हैं।
एमपीआर और मेडलीएपीआर पोर्टल के माध्यम से रिपोर्ट भेजने में बेहतर काम करने वाले यशवंत प्रताप सिंह, उमेश साहू, प्रदीप आर्य, निलेश पाण्डेय, कृष्णचंद सिदार, तोपसिंह नवरंग, किशोर कैंवट, विवेक पाण्डेय, भावेश शेण्डे और अवनीश पासवान के नाम भी प्रशंसा के लिए दर्ज किए गए हैं।