
Mukri daughter on Amitabh Bachchan: लगभग छह दशकों से, जब से उन्होंने 1960 के दशक के आखिर में बॉलीवुड फिल्मों में अपना एक्टिंग करियर शुरू किया, अमिताभ बच्चन ने अलग-अलग जेनरेशन के कई बेहतरीन अभिनेताओं के साथ काम किया है और उनमें से कई के साथ मजबूत ऑन-स्क्रीन बॉन्ड बनाए हैं; उन्हीं में से एक थे दिवंगत अभिनेता मुकरी। दोनों ने 'लावारिस', 'शराबी' और 'कुली' जैसी फिल्मों में साथ काम किया था। फिर भी, जब 2000 में मुकरी का निधन हुआ, तो अमिताभ और जया बच्चन उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। हाल ही में विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर एक इंटरव्यू में उस दौर को याद करते हुए, मुकरी की बेटी नसीम मुकरी ने बताया कि उनके पिता के अंतिम संस्कार में ऋषि कपूर सुबह 7 बजे पहुंचे थे और मुकरी के निधन की खबर सुनकर "बच्चे की तरह रो रहे थे।"
इस इंटरव्यू में बातचीत के दौरान, नसीम से पूछा गया कि क्या मुकरी के निधन के बाद अमिताभ ने उनके परिवार के साथ दोस्ती बनाए रखी, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आगे बताया कि मुकरी के गुजरने के बाद उन्होंने कभी उनके घर का दौरा नहीं किया। उन्होंने बताया कि अमिताभ बच्चन के शुरुआती संघर्ष के दिनों में, जब वो अपने छोटे भाई अनवर के साथ महमूद के घर में रहते थे, तो अमिताभ कभी-कभी वहां आते थे, लेकिन समय के साथ सब बदल गया।
इसके आगे उन्होंने कहा, "फिल्मों में दोस्ती ऐसी ही होती है।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक आप एक हिट जोड़ी हैं - चाहे हीरोइन हों, कॉमेडियन हों, विलेन हों या कोई और - और जब तक आप फिल्म को हिट बना रहे हैं, तब तक दोस्ती बहुत अच्छी रहती है। लेकिन उसके बाद, अगर बात नहीं बनती, तो बस 'बाय-बाय' हो जाता है।"
क्या बच्चन अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे, इस पर नसीम कहा, "नहीं।" उन्होंने बताया कि उनके पिता मुकरी के जया बच्चन के साथ भी अच्छे संबंध थे; उन्होंने उनकी शुरुआती फिल्मों में से एक, 'पिया का घर' में उनके साथ काम किया था। उन्होंने कहा, "'पिया का घर' की वजह से जया बच्चन मेरे पिता की बहुत अच्छी दोस्त बन गई थीं। उस समय, गांवों में आउटडोर शूटिंग के दौरान वो सब साथ रहते थे। लेकिन वो कभी नहीं आईं। उन्होंने फोन तक नहीं किया।"
इसके साथ ही उन्होंने याद करते हुए बताया कि ऋषि कपूर को रात 2 बजे टीवी पर खबर देखकर मुकरी के निधन के बारे में पता चला और सुबह 7 बजे तक वो श्रद्धांजलि देने पहुंच गए। खबर तुरंत प्रसारित हो गई थी। सुबह 7 बजे डोरबेल बजी, हमने दरवाजा खोला तो वो वहां खड़े थे और बच्चे की तरह रो रहे थे। क्योंकि मेरे पिता ने ऋषि के साथ काफी काम किया था।"
ऋषि और मुकरी ने कई फिल्मों में साथ काम किया था, जिनमें 'अमर अकबर एंथनी' भी शामिल है, जिसमें मुकरी ने नीतू कपूर के ऑन-स्क्रीन पिता की भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, "'तैयब अली' गाना ऋषि और मुकरी की परफॉर्मेंस की वजह से ही इतना सफल हुआ था।"
बता दें कि मुकरी का निधन साल 2000 में मुंबई में 78 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। उन्हें 'मदर इंडिया' और 'बॉम्बे टू गोवा' जैसी फिल्मों में अपनी कॉमेडी भूमिकाओं के लिए काफी पहचान मिली थी। इतना ही नहीं अगर आपको 'लावारिस' फिल्म में अमिताभ बच्चन का वो डायलॉग याद हो कि "मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी…", तो वो नत्थूलाल कोई और नहीं बल्कि मुकरी ही थे।"