
Kubbra Sait Yoga Journey: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2026) के अवसर पर 'संकल्प' फेम और बॉलीवुड की कुकू यानी कुब्रा सैत ने योग को अपनी जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसे न सिर्फ फिटनेस, बल्कि खुद से जुड़ने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका बताया है। पत्रिका से बातचीत के दौरान कुब्रा सैत ने योग के महत्व पर बात की, आइये जानते हैं, अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वो रोजाना योग के लिए समय कैसे निकालती हैं?
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आपके लिए व्यक्तिगत रूप से क्या मायने रखता है?
योग दिवस मुझे याद दिलाता है कि खुद से जुड़ने की यह एक प्रभावी साधना है। योग ने मुझे सिखाया है कि मजबूती और कोमलता साथ-साथ चल सकती हैं, और जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्राएं हमारे भीतर ही होती हैं।
इतने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद आप योग के लिए समय कैसे निकालती हैं और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा कैसे बनाए रखती हैं?
मैं योग को अपनी टू-डू लिस्ट का एक और काम नहीं मानती। ये हर दिन खुद से संवाद शुरू करने का मेरा तरीका है। किसी दिन लंबा अभ्यास होता है, तो किसी दिन सिर्फ दस मिनट का ध्यानपूर्ण अभ्यास, लेकिन मैं हमेशा योग के लिए समय निकालती हूं और योग मैट पर लौट आती हूं।
आपको कब महसूस हुआ कि योग को अपनाना चाहिए? क्या कोई खास पल या अनुभव था जिसने आपको प्रेरित किया?
सच कहूं तो शुरुआत में मैं बॉडी फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने के लिए योग से जुड़ी थी, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि इसने मुझे मानसिक स्थिरता भी दी। कोई एक खास पल नहीं था, बल्कि धीरे-धीरे मैंने महसूस किया कि मैं जीवन की परिस्थितियों का सामना पहले से कहीं अधिक जागरूकता, धैर्य और सहजता के साथ करने लगी हूं।
योग को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने के बाद मानसिक और शारीरिक रूप से आपने क्या बदलाव महसूस किए?
शारीरिक रूप से मैं खुद को पहले से अधिक मजबूत, फ्लेक्सिबल और अपने शरीर से बेहतर जुड़ा हुआ महसूस करती हूं। वहीं, मानसिक रूप से योग मुझे मन के शोर को शांत करने में मदद करता है। यह मुझे अपनी भावनाओं और अपनी प्रतिक्रिया के बीच थोड़ा ठहराव देता है, जो मेरे लिए बेहद अनमोल और जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आप अपने प्रशंसकों और दर्शकों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
कुब्रा सैत ने इस सवाल पर जवाब दिया कि योग शुरू करने के लिए आपको कठिन आसन करने या पैरों की उंगलियों को छूने की जरूरत नहीं है। योग किसी प्रदर्शन का नाम नहीं, बल्कि वर्तमान में पूरी तरह उपस्थित रहने की कला है। जहां हैं, वहीं से शुरुआत कीजिए, नियमित अभ्यास कीजिए और योग को अपनी गति से अपनाइए। धीरे-धीरे आप खुद इसके सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे।