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ममता कुलकर्णी ने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- केवल चार वेदों को कंठस्थ करने से कोई…

Mamta Kulkarni On Swami Avimukteshwaranand saraswati: ममता कुलकर्णी के बयान ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। उन्होंने अपने माघ मेला और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर बयान दिया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
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Jan 25, 2026
Mamta Kulkarni dig on Swami Avimukteshwaranand saraswati magh mela controversy said he is arrogant
ममता कुलकुर्णी ने किया कमेंट

Mamta Kulkarni On Swami Avimukteshwaranand saraswati: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहा माघ मेला इन दिनों आस्था के साथ-साथ बयानों के तीखे बाणों का भी केंद्र बना हुआ है। साधु-संतों के बीच चल रही खींचतान में अब किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर और पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने भी एंट्री मार ली है। लंबे समय से सार्वजनिक मंचों से दूर ममता ने इस बार माघ मेले में न आने की वजह बताई और साथ ही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर बेहद तीखा हमला बोला है।

ममता बनर्जी ने किया अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद पर पोस्ट (Mamta Kulkarni On Swami Avimukteshwaranand saraswati)

ममता कुलकर्णी ने अपनी अनुपस्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि वह अब एक फिल्मी सितारा नहीं, बल्कि एक तपस्विनी हैं। उन्होंने बताया, "मेरा जीवन पिछले 25 वर्षों से पूरी तरह साधना को समर्पित है। मैं रोजाना गंगाजल से स्नान के बाद ही अपनी पूजा शुरू करती हूं। फिलहाल गुप्त नवरात्र चल रहे हैं और इस दौरान मैं कहीं बाहर नहीं जाती। साधना के इसी कड़े नियम के कारण मैं इस साल माघ मेले में शामिल नहीं हो सकी।"

शंकराचार्य विवाद पर ममता का तीखा प्रहार (Mamta Kulkarni Reaction)

इंटरव्यू के दौरान जब उनसे 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने और उसके बाद उनके धरने पर सवाल पूछा गया, तो ममता कुलकर्णी ने इसे 'अहंकार' करार दिया। उन्होंने कहा, "कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वो राजा हो या रंक, गुरु हो या शिष्य। अगर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पालकी रोकी थी, तो गुरु होने के नाते उन्हें संयम बरतना चाहिए था। अगर स्नान करना ही था, तो पालकी से उतरकर पैदल भी संगम तक जाया जा सकता था, लेकिन उनकी जिद की सजा उनके शिष्यों को भुगतनी पड़ी।"

ममता ने बिना लाग-लपेट के कहा, "केवल चारों वेदों को कंठस्थ कर लेने से ही कोई सच्चा शंकराचार्य नहीं बन जाता। इस पूरे विवाद में अविमुक्तेश्वरानंद जी का अहंकार साफ झलकता है, जो आत्मज्ञान की कमी की निशानी है।"

क्या था पूरा विवाद?

बता दें, मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने 200 शिष्यों के साथ पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए निकले थे। प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पालकी ले जाने पर रोक लगा दी थी और पैदल जाने का सुझाव दिया था। इसी बात को लेकर करीब तीन घंटे तक मेला क्षेत्र में तनाव बना रहा और शंकराचार्य धरने पर बैठ गए थे।

Updated on:
25 Jan 2026 03:55 pm
Published on:
25 Jan 2026 03:55 pm
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