
Pradeep Rawat Stage 4 Cancer: 'गजनी', 'लगान' और 'सरफरोश' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाओं के लिए मशहूर एक्टर प्रदीप रावत का 4 अगस्त को कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया। वो 74 वर्ष के थे। गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने कभी काम करना बंद नहीं किया। अपनी सेहत से जुड़ी मुश्किलों के बारे में प्रदीप रावत ने 2024 में सिद्धार्थ कन्नन के साथ एक इंटरव्यू में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उन्होंने कई हार्ट ब्लॉकेज, बाईपास सर्जरी और स्टेज 4 कैंसर का पता चलने के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी और अपना काम जारी रखा।
इस इंटरव्यू के दौरान वेटरन एक्टर प्रदीप रावत ने कहा कि उन्होंने जिंदगी की अनिश्चितताओं को स्वीकार कर लिया था और उन्हें पूरा भरोसा था कि उनका काम उनके मरने के बाद भी जीवित रहेगा। उन्होंने कहा था, "जब भी मैं आखिरी बार अपनी आंखें बंद करूंगा, सिनेमा के इतिहास में कहीं न कहीं मेरा नाम जरूर बना रहेगा।"
सरफरोश एक्टर ने बताया कि उनकी सेहत से जुड़ी समस्याएं सबसे पहले तब सामने आईं जब वो एक साउथ इंडियन फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। "मैं एक साउथ फिल्म में फाइट सीक्वेंस की शूटिंग कर रहा था, तभी अचानक मेरी सांस फूलने लगी। शूटिंग के बाद मैंने अपनी जांच करवाई क्योंकि मुझे लगा कि मुझे दिल की कोई समस्या हो गई है। उसके बाद डॉक्टर्स ने बताया कि मेरे दिल में पांच ब्लॉकेज हैं, जिनमें से हर एक 90 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉक था, और मुझे स्टेंट के साथ एंजियोप्लास्टी करवाने की सलाह दी।"
इसके बाद उन्होंने बताया किया कि उनकी पत्नी ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा क्योंकि स्टेंट लगाने से शारीरिक रूप से मुश्किल एक्शन सीन करने की उनकी क्षमता सीमित हो सकती थी। आगे उन्होंने कहा, "उस समय, मेरे पास दो-तीन बड़ी फिल्में थीं जिनमें एक्शन सीन होने थे। सिर्फ इसलिए कि मुझे ब्लॉकेज थी, इसका मतलब यह नहीं था कि मैं बिस्तर पर लेट जाऊं और काम करना बंद कर दूं।"
2016 में हुई बाईपास सर्जरी होने के कुछ ही समय बाद अभिनेता को एक और बड़ा झटका लगा और 2018 में उनको पता चला कि उनको कैंसर है। इस पर बात करते हुए उन्होंने बताया, “फिर मैंने देखा कि मेरे मल में खून आ रहा है। जांच के बाद पता चला कि मुझे स्टेज 4 का कैंसर है। घर पर सब हैरान रह गए और रोने लगे। जब वे रिपोर्ट देखकर मेरे पास आए, तो उनके चेहरों से ही मुझे पता चल गया कि यह कैंसर है।”
इसके आगे उन्होंने बताया, “मैं परिवार के सब लोगों को दिलासा दे रहा था। बाईपास सर्जरी के बाद मेरा 20 किलो वजन कम हुआ था, पर मैंने उसे वापस पा लिया था, और फिर वही 20 किलो वजन दोबारा कम हो गया। एक पल के लिए भी मुझे नहीं लगा कि मैं मर जाऊंगा।"
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया, “एक पल के लिए भी मुझे ऐसा नहीं लगा कि मेरे साथ कुछ बुरा होगा। मैं ही अपने परिवार को हिम्मत दे रहा था। आज भी, मैं रोज दो घंटे एक्सरसाइज करता हूं और किसी भी चीज के लिए तैयार रहता हूं।” रावत ने कहा कि जब उन्हें स्टेज 4 कैंसर का पता चला, तो उन्हें अपनी गुजर चुकी मां की कही बात याद आई, "कि जो होना है, वह होकर रहेगा।"
प्रदीप रावत ने चार दशकों से ज्यादा के अपने करियर में उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, भोजपुरी, नेपाली और मराठी सिनेमा में काम किया। उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में एक्टिंग शुरू की थी, मगर बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' में अश्वत्थामा के किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। बाद में वो गजनी और एस.एस. राजामौली की 'सई' जैसी फिल्मों के साथ भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार स्क्रीन खलनायकों में से एक बन गए।
अगर रावत की फिल्मों की बात की जाए तो उनकी सफल फिल्मों की लिस्ट काफी लम्बी हैं, इन फिल्मों में 'लगान', 'सरफरोश', 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई', 'स्टालिन', 'राउडी राठौड़', 'वीरम, 1: नेनोक्कडाइन', 'लोक्यम', 'नेनु शैलजा', 'सर्रेनोडु', 'नेने राजू नेने मंत्री', 'अयिराथिल इरुवर', 'मार्केट राजा एमबीबीएस' और मिस मैच के नाम शामिल हैं।