हालांकि इस बार उनका किरदार पहले जैसा खौफनाक नहीं था। फिल्म में वह एक तांत्रिक की भूमिका में नजर आए, जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ कहानी में भावनात्मक रंग भी जोड़ता है। उन्होंने एक ऐसे पिता का किरदार निभाया, जो चाहता है कि उसका बेटा परिवार की विरासत पर गर्व करे। इस तरह अपने आखिरी रोल में प्रदीप रावत ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ विलेन ही नहीं, बल्कि हर तरह के किरदार निभाने की क्षमता रखते थे।