Bundi News: रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में वन विभाग ने जल संरक्षण और वन्यजीव विकास को लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। कालदां क्षेत्र में एनीकट निर्माण से सालभर पानी की उपलब्धता बनी रहेगी, जिससे बाघों समेत अन्य वन्यजीवों को फायदा मिलेगा।
Ramgarh Vishdhari Tiger Reserve: बूंदी जिले के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित कालदां क्षेत्र जल्द ही वन्यजीवों के लिए और अधिक अनुकूल बनने जा रहा है। वन विभाग ने यहां जल संरक्षण को बढ़ावा देने और बाघों के स्थायी आवास विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बाघिन आरवीटी-8 की टेरेटरी माने जाने वाले कालदां के जंगलों में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए जयपुर भेज दिए हैं।
वन विभाग की योजना के तहत मोचड़ियां के देवनारायण से लेकर भूकी के नाले तक कई स्थानों पर पक्के एनीकट बनाए जाएंगे, जिससे वर्षा जल का संचय हो सकेगा। यह कार्य राजस्थान वन एवं जैवविविधता विकास परियोजना के अंतर्गत कराया जाएगा। यह परियोजना राज्य के दक्षिण-पूर्वी 13 जिलों में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव विकास के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।
कालदां क्षेत्र का यह नाला करीब 8 किलोमीटर लंबा है और यहां पूरे वर्ष पानी उपलब्ध रहता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र बाघ, बघेरा समेत कई वन्यजीवों के लिए प्रमुख आश्रय स्थल बना हुआ है। नाले में पहले से मौजूद प्राकृतिक जलस्रोतों में सालभर पानी भरा रहता है, लेकिन अब एनीकट निर्माण के बाद भूमिगत जल स्तर और बढ़ेगा। इससे गर्मियों में भी झरने लगातार बहते रहेंगे और वन्यजीवों को पानी की कमी नहीं होगी।
प्रस्तावित योजना के तहत कालदां माताजी क्षेत्र के पास सगस जी का दह, कालदह, छोटा डबका, बड़ा डबका और भूकी जलप्रपात के ऊपर जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएंगी। वन विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही परियोजना को स्वीकृति मिल जाएगी और बजट जारी होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से इस क्षेत्र में बाघिन की मौजूदगी देखी जा रही है। पर्यावरण प्रेमी भी लगातार मांग कर रहे थे कि कालदां क्षेत्र को बाघों के अनुकूल विकसित किया जाए। हाल ही में बूंदी के उपवन संरक्षक आलोकनाथ गुप्ता और पूर्व जिला मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वी सिंह राजावत ने क्षेत्र का दौरा कर विकास योजनाओं पर चर्चा की थी।
अगले चरण में यहां ग्रासलैंड विकसित करने और ट्रेक निर्माण की योजना भी बनाई जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि भविष्य में इस क्षेत्र में बाघों का कुनबा बढ़ेगा और यहां टाइगर सफारी शुरू होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।