बूंदी

सफेद हाथी साबित हो रहा बूंदी जिले की कृषि उपज मंडी परिसर में बना विश्राम गृह

नहीं मिल रहा लाभ खुले में सोना पड़ता है किसानों को

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Apr 11, 2018
resting house agricultural durdasha ka shikaar

बूंदी / केशवरायपाटन. कृषि उपज मंडी परिसर में लाखों रुपए खर्च कर बनाया गया किसान विश्राम गृह किसानों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। किसानों को इस विश्राम गृह के नियमों की जानकारी नहीं होने से इसमें हमेशा ताले लगे रहते है। इस समय कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य के कांटों में किसान उपज बेचने आ रहे है। किसान अपनी उपज बेचने मंडी में आते हैं तो उनको खुले में ही सोना पड़ता है।

दिन में भी किसानों को केवल बरामदे में ही बैठना पड़ता है। कमरों में हमेशा ताले लगे रहते है। लाखेरी खुर्द के किसान रामलाल ने बताया कि रात में भी किसान विश्राम गृह के ताले नहीं खोले जाते हैं। इसके नियमों के बारे में कोई जानकरी नहीं है। चाबी किसके पास रहती है कोई नहीं बताता है। भाजपा नेता बृजेश गुप्ता ने बताया कि इस केन्द्र को रात के समय किसानों के लिए नि:श्ुल्क खोलना चाहिए ताकि किसानों को खुले में नहीं सोना पड़े।

भीया के मोहनलाल ने बताया कि यह विश्राम गृह तो अधिकारियों के लिए है। किसानों का तो नाम है। कृषि उपज मंडी के सचिव एन.के.स्वर्णकार ने बताया कि किसान विश्राम गृह में एक रात रुकने के पचास रुपए शुल्क निर्धारित कर रखा है। कोई भी किसान एक रात के ५० रुपए देकर ठहर सकता है। दिन में ठहरने का अलग शुल्क भरना पड़ेगा।

बूंदी जिला ही नहीं संभाग के कृषि उपज मंडी की यही हालत बनी हुई है किसानो के लिए मुलभुत सुवधाओं की कमी देखि जा सकती है

Published on:
11 Apr 2018 12:48 pm