
Electric Vehicle: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में EV लेने वाले लोगों को इंश्योरेंस लेते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है। पेट्रोल या डीजल की गाड़ी के लिए लिया जाने वाला इंश्योरेंस कवर EV के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंजन बेस गाडियों कि तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ज्यादा जोखिम होता है। EV का बीमा प्रीमियम आमतौर पर पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों के प्रीमियम से 20 से 25 फीसदी अधिक होता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ मोटर इंश्योरेंस पर निर्भर रहने के बजाए EV की तकनीकी जरूरतों के आधार पर इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए।
अगर आपकी ईवी की बैटरी अपने आप खराब हो जाए तो आमतौर पर नॉर्मल इंश्योरेंस में यह खर्चा कवर नहीं होगा। दुर्घटना या आपदा की स्थिति में बैटरी को नुकसान होने पर ही नॉर्मल इंश्योरेंस में क्लेम मिलेगा।
आमतौर पर बैटरी किसी इलेक्ट्रिक गाड़ी की कुल कीमत का 30 फीसदी से 50 फीसदी हिस्सा होती है, जिससे यह वाहन का सबसे महंगा कंपोनेंट बन जाती है। ऐसे में बैटरी प्रोटेक्शन राइडर (ऐड-ऑन कवर) वाहन मालिकों को बड़े नुकसान से बचा सकता है। यह कवर उन जोखिमों से सुरक्षा देता है जो सामान्य मोटर बीमा पॉलिसी में पूरी तरह शामिल नहीं होते हैं। इसमें पानी घुसने (वॉटर इन्ग्रेस), शॉर्ट सर्किट, चार्जिंग के दौरान पावर सर्ज, बैटरी में अत्यधिक गर्मी (थर्मल इवेंट) और बैटरी से जुड़े सिस्टम को होने वाले नुकसान जैसे जोखिम शामिल होते हैं।
बैटरी चार्जर EV का एक जरूरी हिस्सा है और यह भी महंगा आता है। ऐसे में यदि चार्जर या चार्जिंग केबल खराब हो जाए तो गाड़ी को काम लेने में दिक्कत आती है। इसी वजह से चार्जर को बीमा कवर में शामिल करना चाहिए। पॉलिसी खरीदते समय यह जरूर जांच लें कि उसमें चार्जिंग केबल, वॉल-माउंटेड चार्जर और बिजली से होने वाले नुकसान का कवर शामिल है या नहीं।
यदि EV की बैटरी रास्ते में खत्म हो जाए, चार्जिंग से जुड़ी कोई समस्या आ जाए या वाहन खराब हो जाए, तो रोडसाइड असिस्टेंस कवर वाहन को नजदीकी चार्जिंग स्टेशन, सर्विस सेंटर या डीलरशिप तक पहुंचाने की व्यवस्था करता है। इसलिए यह ऐड ऑन भी इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए लिया जा सकता है।
EV के लिए लिया जाने वाला इंश्योरेंस मोटर व्हीकल के इंश्योरेंस से महंगा होता है। इसके तीन प्रमुख कारण है।