
Wealth Building Tools: पहले रिटायरमेंट का मतलब था 58 से 60 साल की उम्र में नौकरी छोड़ना। लेकिन आज के युवा इस सोच को पूरी तरह बदल रहे हैं। लंबे काम के घंटे, दबाव भरा माहौल और करियर की अनिश्चितता ने युवाओं को एक नया सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अगले 30-40 साल इसी तरह काम करते रहना जरूरी है? हालांकि, रिटायरमेंट का महत्व कम नहीं हुआ है, लेकिन इसका अर्थ जरूर बदल गया है। पहले रिटायरमेंट का मतलब था कि एक निश्चित उम्र में काम छोड़ देना है। लेकिन आज के युवा आर्थिक स्वतंत्रता पाने के लिए आय के अलग अलग साधन अपना रहे हैं।
नुवामा वेल्थ के प्रेसिडेंट राहुल जैन कहते हैं कि आज के युवा भारतीयों के लिए रिटायरमेंट एक उम्र नहीं, बल्कि एक वित्तीय लक्ष्य बन गया है। सवाल यह नहीं रहा कि कब रिटायर होऊंगा, बल्कि यह बन गया है कि मुझे कितने पैसे चाहिए जिससे काम करना मेरी मजबूरी न रहे। जैन यह भी कहते हैं कि इस जल्दी रिटायर होने की इच्छा में कुछ हिस्सा वित्तीय स्वतंत्रता का है और कुछ हिस्सा काम से भागने की चाहत का भी है। क्योंकि आज के युवा बेचैन हैं, काम का दबाव थकाने वाला है और वे नौकरियां जल्दी बदलते हैं।
इसी बीच युवाओं में Financial Independence, Retire Early (FIRE) की सोच विकसित हो रही है। इसका मतलब है कि उपलब्ध रकम को कम खर्च करके ज्यादा बचत के साथ लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाए, जिससे आर्थिक स्वतंत्रता जल्दी मिल सके। यानी की जल्दी से रिटायर हो सकें।
पिछली पीढ़ी में आय के स्त्रोत सीमित थे, जैसे कि नौकरी या पारिवारिक व्यवसाय। लेकिन आज के युवाओं के पास काम करने के कई ऑप्शन है। यही वजह है कि फ्रीलांसिंग, कंसल्टिंग, कंटेंट क्रिएशन, टीचिंग और एंटरप्रेन्योरशिप जैसे विकल्प आज के युवाओं में बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं।
यह बदलाव सिर्फ कमाई के तरीकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निवेश के तरीकों में भी बदलाव हुआ है। पिछली पीढ़ी के पास निवेश के लिए EPF, FD, सोना और जमीन जैसे सीमित विकल्प थे। लेकिन आज के युवाओं के पास म्यूचुअल फंड, SIP, NPS, स्टॉक्स और REIT जैसे कई रास्ते हैं। SIP की बढ़ती लोकप्रियता इसी बदलाव का उदाहरण है। छोटी रकम से शुरू होकर लंबे समय में बड़ा कॉर्पस बनाना अब आसान हो गया है। साथ ही स्मार्टफोन के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने निवेश को और आसान बना दिया है।