
School Fee Inflation: NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का विरोध जारी है, लेकिन शिक्षा से जुड़ा एक और मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। वह है शिक्षा की फीस में हो रही लगातार महंगाई। अगर आपको लगता है कि सबसे ज्यादा खर्च कोचिंग पर होता है तो सरकारी आंकड़े कुछ और कहानी बता रहे हैं। इस साल स्कूल फीस की महंगाई कोचिंग से दोगुनी रही। साल 2024 को बेस ईयर मानें तो प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्तर पर फीस 6 फीसदी से 9 फीसदी तक बढ़ चुकी है। वहीं, आम धारणा के उलट कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों की फीस में इस दौरान केवल 3 फीसदी से 4 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MOSPI) के जून 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों के मुताबिक, प्राइवेट ट्यूटर और कोचिंग सेंटरों की फीस बढ़ने की रफ्तार लगातार धीमी पड़ रही है। जून 2026 में इस श्रेणी की महंगाई दर घटकर 1.53 फीसदी रह गई, जबकि जनवरी में यह 2.28 फीसदी थी। वहीं, जून में प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों की फीस महंगाई बढ़कर 3.75 फीसदी हो गई, जबकि जनवरी में यह 3.45 फीसदी थी। साथ ही सेकेंडरी और अपर सेकेंडरी स्कूलों की फीस महंगाई 3.64 फीसदी पर पहुंच गई।
CPI के इंडेक्स आंकड़े बताते हैं कि 2024 को बेस ईयर मानने पर जून 2026 तक सेकेंडरी और अपर सेकेंडरी स्कूलों की फीस इंडेक्स 108.97 अंक पर पहुंच गया। प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों का सूचकांक 108.87, उच्च शिक्षा का 106.20 और प्राइवेट ट्यूशन एवं कोचिंग का 103.94 अंक रहा। इससे स्पष्ट होता है कि पिछले दो वर्षों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी स्कूल फीस में हुई है, जबकि कोचिंग फीस अपेक्षाकृत कम बढ़ी है।
उच्च शिक्षा (पोस्ट-स्कूल) की फीस में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून में इसकी महंगाई दर 3.99 फीसदी रही, जबकि जनवरी में यह 3.59 फीसदी थी। हालांकि, यह बढ़ोतरी स्कूल फीस जितनी तेज नहीं रही, लेकिन कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर भी छात्रों की पढ़ाई पहले के मुकाबले महंगी हुई है।