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Stock Market: रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर में बिकवाली से टूटा मार्केट, सेंसेक्स 719 पॉइंट गिरकर हुआ बंद, जानें वजह

Stock Market Crash: सोमवार को सेंसेक्स 719 अंक गिरकर 73,524 पर बंद हुआ। ईरान-इजराइल तनाव और कच्चे तेल में उछाल से बिकवाली हुई। निफ्टी रियल्टी और मेटल इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा टूटे।

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Jun 08, 2026
Stock Market News
बाजार में गिरावट देखी जा रही है। (PC: AI)

Share Market : सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली हुई। सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.97 फीसदी की गिरावट के साथ 73,524.26 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी-50 में 243.70 अंक यानी 1.04 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई जिसके बाद यह 23,130 के स्तर पर बंद हुआ।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों को डरा दिया। इंडिया VIX जिसे बाजार का फियर गेज कहते हैं, वह 7.85 फीसदी उछलकर 17.03 पर पहुंच गया। VIX जितना ऊंचा होता है, बाजार में अनिश्चितता उतनी ज्यादा होती है। यह आंकड़ा बताता है कि निवेशक इस वक्त काफी घबराए हुए हैं।

रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे

निफ्टी में सेक्टोरल इंडेक्स में हेल्थकेयर को छोड़कर सभी इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा पिटे, दोनों में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। यानी रियल एस्टेट और धातु कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.4 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.9 फीसदी टूट गया।

सेक्टरवर्तमान स्तरगिरावट (%)
NIFTY REALTY749.20-2.56%
NIFTY METAL12,913.65-2.33%
NIFTY AUTO25,681.80-1.85%
NIFTY MEDIA1,476.80-1.71%
NIFTY OIL & GAS10,931.70-1.57%
Source: NSE

भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली की वजह

  • इस तेज बिकवाली की बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत है। तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।
  • ईरान और इजराइल के बीच हुए मिसाइल हमले से क्षेत्रीय अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके बाद वैश्विक बाजारों में गिरावट देेखने को मिली थी। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत भी भारतीय बाजार के लिए गिरावट का कारण बने। एशिया के प्रमुख बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में भारी दबाव में रहे।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार की कमजोरी का बड़ा कारण बनी हुई है। साल 2025 में FPIs की कुल निकासी 1.66 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, अब तक साल 2026 में यह आंकड़ा 2.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
  • इसके अलावा रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.35 पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 17 पैसे कम था। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का लाभ कम होता है।
Updated on:
08 Jun 2026 04:40 pm
Published on:
08 Jun 2026 04:24 pm