
Term Insurance Benefits: टर्म इंश्योरेंस खरीदते समय ज्यादातर लोग एक पुराने नियम पर भरोसा करते हैं। वह नियम है कि सालाना आय का 10 से 15 गुना कवर लेना ठीक है। लेकिन सच यह कि अब ये फॉर्मुला काम नहीं करता, क्योंकि लगातार बढ़ती महंगाई, लाइफस्टाइल खर्च, बड़े होम लोन और हायर एजुकेशन की फीस इंश्योरेंस से मिलने वाले कवर की वैल्यू को आधे से भी कम कर देते हैं।
लोगों को बीमा खरीदते समय मिलने वाले कवर पर नहीं, बल्कि उनके न रहने पर परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी, इस बात पर ध्यान देना चाहिए। बीमा एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर महंगाई दर को कैलकुलेशन में शामिल न किया जाए तो आज जो कवर पर्याप्त लगता है, वह आने वाले सालों में उतना असरदार नहीं रहता। लॉन्ग टेल वेंचर्स के परमदीप सिंह कहते हैं कि असली सवाल यह नहीं कि व्यक्ति कितना कमाता है, बल्कि यह है कि उसके न रहने पर परिवार की कितनी जिम्मेदारियां बाकी रह जाएंगी।
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने आज 1 करोड़ रुपये का टर्म कवर पर्याप्त मान लिया। अगर महंगाई दर 6 प्रतिशत सालाना रहे, तो 10 साल बाद इस रकम की असली खरीद क्षमता घटकर करीब 56 लाख रुपये और 20 साल बाद महज 31 लाख रुपये के बराबर रह जाएगी। वहीं, अगर महंगाई दर 7 प्रतिशत मान ली जाए तो यह गिरावट और तेज होगी। 10 साल में कवर की असली कीमत करीब 51 लाख रुपये यानी लगभग आधी और 20 साल में घटकर सिर्फ 26 लाख रुपये यानी मूल कवर के चौथाई हिस्से तक रह जाएगी। यानी कि 6-7 प्रतिशत महंगाई दर पर कवर की कीमत आधी होने में करीब 10 से 12 साल ही लगते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल आय का 10 या 20 गुना बीमा कवर लेने के बजाए ह्यूमन लाइफ वैल्यू (HLV) फॉर्मूला अपनाना चाहिए। इस तरीके में यह देखा जाता है कि कोई व्यक्ति आने वाले वर्षों में अपने परिवार के लिए कितनी आर्थिक मदद और आय का योगदान देगा।
कोटक लाइफ के प्रोडक्ट्स प्रमुख रंजीत मिश्रा के अनुसार, HLV तय करते समय परिवार के खर्च, कर्ज, भविष्य के फाइनेंशियल गोल और परिवार के आश्रितों को कितने समय तक आर्थिक सहायता की जरूरत होगी, जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।