
चित्रकूट(Chitrakoot saint controversy) : धार्मिक जगत से जुड़े दो प्रमुख पक्षों के बीच चल रहा विवाद अब सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित व्हाट्सएप चैट के बाद और गहरा गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी ने एक कथित चैट सार्वजनिक करते हुए तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं रामचंद्र दास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चैट को पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताया है।
सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की बात लिखी दिखाई दे रही है। चैट में यह भी उल्लेख है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर देने और प्रभावशाली लोगों से फोन करवाने की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि इस चैट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि वायरल चैट से यह संकेत मिलता है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले में कार्रवाई किसी सुनियोजित रणनीति के तहत कराई गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी जान को खतरा है और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
दूसरी ओर, आरोपों के जवाब में आचार्य रामचंद्र दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा कि वायरल चैट पूरी तरह फर्जी है और इसकी किसी भी एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि जांच के लिए उनका मोबाइल फोन तत्काल जब्त कर लिया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
रामचंद्र दास ने बिना नाम लिए आशुतोष ब्रह्मचारी पर भी पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ अभियान चला रहा व्यक्ति कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी रह चुका है और कुछ समय से निजी कारणों से उनसे नाराज है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि यह विवाद पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में है। इससे पहले आशुतोष ब्रह्मचारी ने एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य की सुरक्षा को उनके ही उत्तराधिकारी से खतरा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रामभद्राचार्य ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर इसे सुनियोजित साजिश बताया था। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और चैट को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी या प्रशासन की ओर से वायरल सामग्री की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।