चित्तौड़गढ़

Success Story: कचरा गाड़ी चालक की बेटियों ने रचा इतिहास, ईशा और आंचल अब संभालेंगी खाकी की जिम्मेदारी

Success Story: चित्तौड़गढ़। कहते हैं प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है गंगरार कस्बे की बाल्मीकि बस्ती निवासी दीपक की दो बेटियों ने।

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पुलिस कांस्टेबल पद पर च​यनित ईशा और आंचल परिजनों के साथ, पत्रिका फोटो

चित्तौड़गढ़। कहते हैं प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है गंगरार कस्बे की बाल्मीकि बस्ती निवासी दीपक की दो बेटियों ने। दीपक, जो नगर पंचायत में कचरा गाड़ी चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, उनकी दोनों बेटियां ईशा व आंचल का एक साथ राजस्थान पुलिस में चयन होने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।

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गांव में बेटियों का भव्य स्वागत

शुक्रवार को जब दोनों बेटियां गांव पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। बेटियों की सफलता पर पिता दीपक भावुक हो गए। उन्होंने नम आंखों से बताया कि मैं अनपढ़ हूं और कचरा गाड़ी चलाकर गुजारा करता हूं। मुझे शिक्षा के महत्व का इतना ज्ञान नहीं था, लेकिन मेरी बेटियों में जज्बा था।

ईशा और आंचल पांचवीं कक्षा से ही उपखंड मुख्यालय पर संचालित निशुल्क शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कर रही थीं। अगर यह संस्थान नहीं होता, तो मेरे जैसा गरीब पिता अपनी बेटियों को इस मुकाम तक कभी नहीं पहुंचा पाता। यह संस्थान हम जैसों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

बेटियों की सफलता पूरे समाज के लिए प्रेरणा

दोनों बेटियों की इस उपलब्धि पर समाजसेवी मनोज मीना, राहुल, पवन, पुष्पेंद्र और राजू खटीक सहित प्रबुद्धजनों ने साफा पहनाकर और मुंह मीठा करवाकर उनका अभिनंदन किया। वक्ताओं ने कहा कि ईशा और आंचल की सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।

संस्थान बना सफलता का केंद्र

गौरतलब है कि इस वर्ष उपखंड मुख्यालय के इस निशुल्क शिक्षण अभियान ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती में इस संस्थान से इस बार कुल सात विद्यार्थियों का चयन हुआ है, जो ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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