
Hariyali Teej Puja Vidhi: इस बार सावन कुछ ज्यादा ही खास है। एक ही दिन दो-दो त्योहारों का ऐसा संयोग बना है कि घर-आंगन से लेकर गली-मोहल्ले तक खुशियां दोगुनी हो जाएंगी। 15 अगस्त को जहां पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा होगा, वहीं इसी दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए हरियाली तीज का निर्जला व्रत भी रखेंगी। धर्म और देशभक्ति का यह संगम बरसों बाद देखने को मिलेगा। हरियाली तीज पर सिद्धि योग, शिव योग और शनिवार का खास संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, हरियाली तीज (Hariyali Teej 2026) सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह दिन शिव-पार्वती के अटूट मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन कठोर तपस्या के बाद माता पार्वती को भगवान शिव ने पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए यह पर्व सुहाग की अमरता का पर्व कहलाता है।
इस बार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 06.47 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 05.29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज 15 अगस्त शनिवार को ही मनाई जाएगी।
इस खास दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। सोलह श्रृंगार करते हुए हरी साड़ियां, हरी चूड़ियां और हाथों में गहरी रची मेहंदी मुख्य आकर्षण होगी। घरों और मोहल्लों में पेड़ों पर डाले गए झूले, सावन के पारंपरिक लोकगीत और मुंह मीठा कराने के लिए घेवर जैसी खास मिठाइयों की महक फिजा में घुली होगी। महिलाएं मिट्टी से शिव-पार्वती की मूर्तियां बनाकर विधि-विधान से पूजा करेंगी और कथा सुनेंगी।
हरियाली तीज से एक दिन पूर्व शुक्रवार को सिंजारा मनाया जाएगा, जिसमें ससुराल पक्ष से नवविवाहिताओं के लिए वस्त्र, आभूषण, श्रृंगार सामग्री, मेहंदी और घेवर-फेनी भेजी जाती है। पूजन के बाद सास अथवा घर की वरिष्ठ महिला के चरण स्पर्श कर सुहागी भेंट करने और आशीर्वाद लेने की परंपरा है।
पार्थिव प्रतिमा पूजन : शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की प्रतिमाएं बनाएं।
षोडशोपचार आराधना : माता पार्वती को सुहाग सामग्री व चुनरी अर्पित करें तथा भगवान शिव को वस्त्र व बिल्वपत्र अर्पित कर षोडशोपचार विधि से पूजन करें।