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पितृ पक्ष में आया बड़ा पड़ाव, मालामाल बना सकती है अष्टमी तिथि पर पूजा पाठ

Shraddha Paksha : श्राद्ध पक्ष में लक्ष्मी पूजन का विधान, धन संपत्ति के लिए अष्टमी तिथि का महत्व, जानिए अब कब किसका करें श्राद्ध
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भारत

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deepak deewan

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Sep 29, 2026

laxmiji

पितृ पक्ष में अष्टमी पूजा मालामाल बना सकती है : फोटो सोर्स : AI@Grok

Shraddha Paksha : पितृ पक्ष में अब बड़ा पड़ाव आ गया है। मंगलवार यानि 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध में अपने पूर्वजों के नाम तर्पण श्राद्ध किया जा रहा है। इसी प्रकार श्राद्ध/महाभरणी 30 को किया जाएगा। भोपाल के पं. रामनारायण आचार्य बताते हैं कि इस दिन उन पूवजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हुई हो। तिथि को शास्त्र अनुसार मान्य किया गया है। खास बात यह है कि पितृ पक्ष में मालामाल बनाने वाली तिथि भी आती है। अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी पूजा की जाती है जोकि धन संपत्ति प्रदान करनेवाली मानी जाती है। इस बार महालक्ष्मी पूजा 3 अक्टूबर को की जाएगी।

अष्टमी श्राद्ध और महालक्ष्मी पूजा

चतुथी श्राद्ध 30 सितंबर: श्राद्ध पक्ष की चतुर्थी तिथि 30 सितंबर को है। इसके साथ ही 'महा भरणी' का श्राद्ध भी इसी दिन है, जो भरणी नक्षत्र से जुड़ा विशेष श्राद्ध है। बता दें कि कुछ पंचांगों में 29 सितंबर को भरणी श्राद्ध दर्शाया गया है।

पंचमी श्राद्ध (1 अक्टूबर): जिन पूर्वजों की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है। इसे 'कुंवारा पंचमी' भी कहा जाता है, यदि परिवार में किसी अविवाहित सदस्य की मृत्यु हुई हो।

षष्ठी श्राद्ध (2 अक्टूबर): इस तिथि को देह छोडऩे वाले पूर्वजों का स्मरण, पिंड दान किया जाता है। सप्तमी तिथि के श्राद्ध के लिए भी यह दिन निर्धारित है।

अष्टमी श्राद्ध और महालक्ष्मी पूजा (3 अक्टूबर): इस तिथि को दिवंगत पूर्वजों का तर्पण किया जाता है। इसी दिन महालक्ष्मी पूजा का भी विधान है। मिट्टी का हाथी बनाकर पूजा की जाती है, जिससे परिवार में सुख समृद्धि आती है।

नवमी श्राद्ध (4 अक्टूबर): इसे 'मातृ नवमी' भी कहा जाता है। परिवार की दिवंगत माताओं, स्त्रियों और सुहागिन महिलाओं का श्राद्ध करने यह तिथि श्रेष्ठ मानी जाती है, भले ही माता की मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो। कई परिवार मातृ नवमी के दिन उनका श्राद्ध करते हैं।

दशमी श्राद्ध (5 अक्टूबर): दशमी तिथि को प्राण छोडऩे वाले पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त अन्न-जल का दान किया जाता है।

प्रमुख बिंदु

पितृ पक्ष में अष्टमी तिथि का महत्व
लक्ष्मी पूजा बना सकती है मालामाल
3 अक्टूबर को है अष्टमी श्राद्ध
पंचमी श्राद्ध 1 अक्टूबर को
इस दिन अविवाहित पूर्वजों का करते हैं तर्पण
नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर को
दिवंगत माताओं, स्त्रियों, सुहागिन महिलाओं के तर्पण का दिन