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29 सितंबर को बड़ा नक्षत्र, घर बैठे ही गया श्राद्ध के समान मिल सकता है फल

Gaya Shraddha : जानें मंगलवार 29 तारीख को कब है कुतुप काल, तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त, भरणी नक्षत्र का महत्व
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भारत

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deepak deewan

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Sep 28, 2026

pitra paksh

भरणी श्राद्ध का गया श्राद्ध के समान फल- photo ai

Gaya Shraddha : पितृ पक्ष की तृतीया तिथि 29 सितंबर को है। इस तिथि की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि मंगलवार को भरणी श्राद्ध भी है जोकि बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। भरणी नक्षत्र के कारण इसका नामकरण किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र के स्वामी खुद यमराज हैं। यही वजह है कि भरणी नक्षत्र में पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करना ज्यादा फलदायी कहा गया है। शास्त्रों में भरणी श्राद्ध का फल गया श्राद्ध जैसा बताया गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि 29 सितंबर, मंगलवार को महा भरणी श्राद्ध होगा। इस दिन भरणी नक्षत्र सुबह करीब 9.03 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर की सुबह 7 .36 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में अपने पितरों का श्राद्ध करना और तर्पण करना बहुत शुभ परिणाम देता है।

क्‍यों है भरणी श्राद्ध का महत्‍व?

पितृ पक्ष में जब अपराह्न काल में भरणी नक्षत्र रहता है तब भरणी श्राद्ध किया जाता है। इसे ही महा भरणी श्राद्ध भी कहते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार भरणी नक्षत्र के स्‍वामी यमराज हैं। इस वजह से भरणी श्राद्ध पर पितरों के निमित्त कर्म करने से वे प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्‍मा को सुख व शांति मिलती है।

श्राद्ध पक्ष में कुतुप मुहूर्त का महत्व है जोकि दिन का आठवां मुहूर्त होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान यह काल पूर्वजों के श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। 29 सितंबर को कुतुप मुहूर्त सुबह 11.47 बजे से 12.35 बजे तक रहेगा।

गया में किए गए श्राद्ध के समान फल देने वाला

धार्मिक मान्यता के अनुसार भरणी श्राद्ध पितृ पक्ष का एक महत्वपूर्ण दिन है। इस नक्षत्र में किए गए श्राद्ध को गया में किए गए श्राद्ध के समान फल देने वाला कहा गया है। इस दिन पितरों का श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि करने के विशेष फल मिलते हैं।

29 सितंबर को तृतीया तिथि और महा भरणी श्राद्ध पर तर्पण और श्राद्ध के लिए शुभ मुहूर्त

कुतुप मुहूर्त सुबह 11.47 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक (श्राद्ध और तर्पण के लिए सबसे पवित्र समय)
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:35 बजे से 01:23 बजे तक।
अपराह्न काल: दोपहर 01:23 बजे से 03:51 बजे तक।

तर्पण और श्राद्ध के जरूरी नियम

दिशा: तर्पण करते समय मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
तर्पण के लिए जरूरी सामग्री: जल, काले तिल, कुश और पुष्प
विधि: अपने पितृ तीर्थ (अंगूठे और तर्जनी के बीच का भाग) से पूर्वजों को जल अर्पित करें।