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विश्व का इकलौता शिवलिंग जहां चढ़ता है ‘सिंदूर’, भस्मासुर से बचने यहां छिपे थे महादेव, आज भी मौजूद है वो सुरंग

Sawan Somvar Special: सतपुड़ा की पहाड़ियों में ये अनोखा शिवालय अपनी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र के साथ सिंदूर चढ़ाया जाता है।
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Aug 10, 2026
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Sawan Somvar Special: विश्व का इकलौता शिवलिंग जहां चढ़ता है 'सिंदूर', इटारसी में स्थित है तिलकसिंदूर मंदिर (फोटो सोर्स- Patrika)

Tilak Sindoor Temple: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे खास माना जाता है। खासकर सावन सोमवार (Sawan Somvar) को शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और हर कोई भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करता है। लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसा अनूठा शिवालय भी है, जहां शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाने की सदियों पुरानी परंपरा है। सतपुड़ा की पहाड़ियों, घने जंगल और हंसगंगा नदी के बीच स्थित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के दौरान यहां शरण ली थी। सावन सोमवार, सोम प्रदोष और आर्द्रा नक्षत्र के महासंयोग में जानिए इस रहस्यमयी शिवालय की कहानी, जिसका नाम है तिलकसिंदूर।

सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थापित है अनोखा शिवालय

मध्य प्रदेश की सतपुड़ा के पर्वत पर बना भोलेनाथ का अनूठा शिवालय, जहां शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है। शिव को सिंदूर का तिलक लगाने की वजह से ही इस प्राचीन शिवालय का नाम तिलकसिंदूर पड़ा। इटारसी शहर से 18 किमी दूर स्थित अनूठा शिवालय तिलकसिंदूर है। बताया जाता है कि यहां भगवान शिव पर सिंदूर चढ़ाने या सिंदूर से तिलक करने पर वे प्रसन्न होते हैं। यह उत्तरमुखी शिवालय सतपुड़ा के पहाड़ों में है। इस क्षेत्र में सागौन, साल, महुआ, खैर आदि के पेड़ अधिक हैं। यहां छोटी धार वाली नदीं हंसगंगा नदी बहती है।

सावन में मंदिर में पूजा का है खास महत्व

मंदिर से जुड़े लोगों और पुजारी ने बताया कि साल भर यहां भक्त आते रहते हैं। सावन के महीने में यहां भगवान शिव की पूजा का अलग ही महत्व है। यह भी कहा जाता है कि विश्व के सभी शिवलिंगों में यह स्थान ऐसा है जहां शिवलिंग पर जल, दूध, बिल पत्र के साथ ही सिंदूर चढ़ाया जाता है। इसी लिए यह शिवालय बन गया 'तिलक सिंदूर' है। मेला आयोजन समिति के विनोद बारीबा ने बताया कि हर साल महाशिवरात्रि पर यहां मेला लगता है।

भस्मासुर से बचने यहां भी छुपे थे

माना जाता है कि जब भस्मासुर भगवान शंकर को मारने पीछे पड़ा था, तो पीछा छुड़ाने भगवान ने सतपुड़ा की इन्हीं पहाड़ियों में शरण ली थी। यहां कई दिनों तक छुपने के बाद उन्होंने पचमढ़ी जाने एक सुरंग का निर्माण किया था। यहीं से वे पचमढ़ी के जटाशंकर में जाकर छुपे थे। मान्यताओं के अनुसार आज भी यह सुरंग मौजूद है, जो पचमढ़ी तक पहुंचती है।

भस्मासुर से बचने इस गुफा में छिपे थे महादेव (फोटो सोर्स- Patrika)

श्रावण, सोम, प्रदोष का महासंयोग रहेगा

श्रावण मास के दूसरे सोमवार को भगवान शिव की आराधना का दुर्लभ महासंयोग बनने जा रहा है। इस दिन सोमवार, सोम प्रदोष व्रत और आर्द्रा नक्षत्र का एक साथ होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।

Updated on:
10 Aug 2026 10:43 am
Published on:
10 Aug 2026 10:43 am