Gujarat Vadodara Road Accident: गुजरात के वडोदरा के समीप बुधवार तड़के हुए भीषण बस हादसे में जिंदा बचे यात्रियों ने पत्रिका से बातचीत में खौफनाक मंजर का आंखों देखा हाल बयां किया। परतापुर निवासी कमलेश पाटीदार व कल्पेश गायरी ने बताया कि हादसे से अचानक उनकी नींद टूटी। आगे देखा तो बस का केबिन ट्रक से चिपका था।

डूंगरपुर/गरियता। गुजरात के वडोदरा के समीप बुधवार तड़के हुए भीषण बस हादसे में जिंदा बचे यात्रियों ने पत्रिका से बातचीत में खौफनाक मंजर का आंखों देखा हाल बयां किया। परतापुर निवासी कमलेश पाटीदार व कल्पेश गायरी ने बताया कि वे सूरत मजदूरी करने जा रहे थे और बस में पीछे की सीट पर सवार थे। हादसे से अचानक उनकी नींद टूटी। आगे देखा तो बस का केबिन ट्रक से चिपका था। इमरजेंसी गेट खोलने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुला। शीशा तोड़कर बाहर निकले। बाद में इमरजेंसी गेट खोल लिया गया, जिसके बाद अन्य यात्रियों को निकाला। एक अन्य यात्री हरीश ने बताया कि हादसे से नींद टूटी तो खुद को लहूलुहान देखा वह घबरा गए। परिजनों को सूचना देकर वे अस्पताल में भर्ती हुए।
वहीं, वणियाप सिलौही के हरीश पाटीदार उनके सहयोगी के बंशीलाल पारगी के साथ सागवाड़ा से सूरत जा रहे थे। वहां 25 साल से चाय का व्यवसाय कर रहे हैं। हरीश ने बताया कि हादसे के दौरान सभी यात्री गहरी नींद में थे। इसी दौरान तेज धमाका हुआ और बस आगे चल रहे वाहन से टकरा गई। कुछ समझ पाते उसके पहले हम बुरी तरह घायल हो गए थे और चारों और चित्कार गूंज उठी। मेरे पांवों में से खून निकल रहा था। पर, चलने की ताकत नहीं थी। बस पलटने से कुछ यात्री के चोटिल होने से खून भी चारों तरफ बह रहा था।
करीब आधे घंटे के दरम्यान पुलिस और कुछ लोग आए और बस के शीशे तोड़ कर हमें किसी ने एम्बुलेंस ने बैठाया। हादसे में मेरे और मेरे सहयोगी बंशीलाल दोनों के पांव फैक्चर हो गए हैं और हमें अहमदाबाद रैफर कर दिया है। केबिन में अतिरिक्त सवारियां भरी हुई थी यात्रियों के अनुसार बुधवार अल सुबह तीन बजे जोरदार धमक के साथ उनकी नींद टूटी। हादसे के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। घायल यात्रियों को सागवाड़ा अस्पताल में भर्ती कराया। कुछ घायलों को अहमदाबाद रेफर किया। बस के केबिन में अतिरिक्त सवारियां भरी थी, जिनकी हादसे में मौत हो गई।
वागड़ के गरियता गांव के दिनेश मसार ने बताया कि बस की आखिरी सीट पर सोने के करीब डेढ़ घंटे बाद (तड़के लगभग 4 बजे) अचानक एक जोरदार विस्फोट जैसी आवाज हुई और पूरी बस हिल गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि मैं उछलकर सीधे केबिन से जा टकराया। जब आंख खुली तो चारों तरफ चीख-पुकार मची थी और लोग लहूलुहान हालत में अपनों को पुकार रहे थे। मैंने हिम्मत जुटाते हुए बस की खिड़की का कांच तोड़कर बाहर निकला। बाहर आने के बाद देखा कि ममेरा भाई मुकेश डामोर अंदर बेहोश पड़ा है। उसे झकझोर कर जगाया और सुरक्षित बाहर खींचा। इसके बाद बामनियावाड़ा के दोस्त को भी मलबे से बाहर निकाला।
इधर, हादसे की सूचना सोशल मीडिया पर वायरल होते ही दिनभर लोग एक-दूसरे से जानकारियां लेते नजर आए। सूरत के लिए बांसवाड़ा-डूंगरपुर से जो यात्री रवाना हुए थे, उनके परिजन भी फोन पर हकीकत जुटाते रहे। इसी बीच हादसे में मौत की सूचना गांवों तक पहुंचते ही शोक की लहर छा गई। परिजनों का भी रो-रोकर हाल बुरा हो गया। उधर, हादसे के बाद कुछ यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, वहीं गंभीर घायलों का उपचार जारी रहा। वागड़ से भी परिजन वडोदरा पहुंचे।