राजस्थान के दक्षिणी राजस्थान का डूंगरपुर जिला स्वर्ण-रजत नगरी के नाम से भी पूरे देश में ख्याति लिए हुए हैं और बात जब त्योहारी सीजन की आती है, तब यहां लोग सोना-चांदी के जेवरात, सिक्के एवं सिल्लियां खरीदने में खासी रुचि दिखाते हैं।
डूंगरपुर। राजस्थान के दक्षिणी राजस्थान का डूंगरपुर जिला स्वर्ण-रजत नगरी के नाम से भी पूरे देश में ख्याति लिए हुए हैं और बात जब त्योहारी सीजन की आती है, तब यहां लोग सोना-चांदी के जेवरात, सिक्के एवं सिल्लियां खरीदने में खासी रुचि दिखाते हैं।
फेस्टिवल सीजन का आगाज नवरात्रि की एकम के साथ ही हो रहा है और यह सीजन दीपावली की पंचमी तक जारी रहेगा। व्यापारियों का कहना है कि सोने और चांदी के दाम फिलहाल ऑलटाइम हाई पर है। पर, त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही ग्राहकी एक बार फिर जोर पकड़ेगी। ऐसे में सोना-चांदी के व्यापार से जुड़े व्यापारियों ने त्योहारी सीजन को देखते हुए ग्राहकी को लेकर तैयारियां कर ली हैं।
यहां के लोगों का मानना है कि दशहरा, धनतेरस, दीपावली के साथ ही गुरु-रवि पुष्य नक्षत्र आदि पर सोने-चांदी के आभूषण-सिक्के व सिल्लियां आदि खरीदकर शुभ मुहूर्त में पूजन करते हैं। साथ ही यह वर्ष की सबसे सुरक्षित बचत और निवेश होता है। सोना-चांदी के भावों का अब तक का रिकार्ड देखे, तो इस धातु ने कभी ग्राहकों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। हर साल कम से कम 20 से 30 फीसदी रिर्टन दिया है।
दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर जिले के स्वर्ण-रजत आभूषणों की शुद्धता की साख पूरे देश में अपनी अलग पहचान स्थापित करती है। यहां न केवल हॉल मार्किंग युक्त अत्याधुनिक डिजाइन के गहने मिलते हैं। साथ ही भविष्य में डिजाइन चेंज करवाने या गहनों को बदलवाने पर 92 फीसदी रिटर्न के साथ ही गहने वापस भी लिए जाते हैं। हर छोटा-बड़ा गहना पक्के जीएसटी युक्त बिल के साथ ही दिया जाता है। ऐसे में गहनों की पूर्ण शुद्धता की गारंटी होती है। ऐसे में डूंगरपुर जिले के सोने-चांदी की दुकानों पर स्थानीय ग्राहकों की भीड़ तो दिखाई ही देती है। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही मध्यप्रदेश, गुजरात से भी बड़ी संख्या में ग्राहकों के साथ ही छोटे-बड़े व्यापारी भी यहां खरीदारी के लिए आते हैं। उनका कहना है कि यहां के गहनों की शुद्धता का पूरे देश में कोई सानी नहीं है।
डूंगरपुर जिले में बात जब त्योहारी सीजन खासकर दशहरा, धनतेरस एवं दीपावली पर बिक्री की आए, तो लोगों की पहली पसंद सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के एवं सिल्लियों की होती है। सोना-चांदी के व्यापारी बताते हैं कि डूंगरपुर व सागवाड़ा को मिलाकर पूरे जिले में करीब 400 से 450 दुकानें सर्राफा व्यवसाय से जुड़ी हैं। यहां त्योहारी सीजन में अमूमन रोज 10 किलो सोना तथा 100 किलो चांदी का व्यापार होता है। ऐसे में 32 दिनों के इस फेस्टिवल सीजन में करीब 320 किलो से 500 किलो सोना तथा 32 से 50 क्विंटल चांदी का व्यापार होना तय माना जा रहा है।
सोना-चांदी के व्यापारी बताते है कि सोना-चांदी के भाव अभी आसमान में हैं। ऐसे में लोगों को अपना बजट बढ़ाना होगा। वहीं, ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कम वजनी की लेटेस्ट डिजाइन के गहने तैयार किए हैं। वहीं, सोने के सिक्के भी एक ग्राम से उपलब्ध हैं। ऐसे में ग्राहक अपने बजट के अनुसार त्योहारी सीजन में खरीदारी कर पाएंगे।
400 से 450 दुकाने हैं डूंगरपुर -सागवाड़ा सहित पूरे जिले में
32 दिन का रहेगा पूरा फेस्टिवल सीजन
10 किलो हर रोज गोल्ड बिक्री का अनुमान फेस्विटल सीजन में
100 किलो हर रोज चांदी की बिक्री का गणित
80000 रुपए 10 ग्राम के आसपास थे 2024 में गोल्ड के भाव
1,14000 रुपए करीब है इस वर्ष गोल्ड के भाव
80 से 85 हजार रुपए प्रति किलो भाव थी चांदी वर्ष 2024 में 1,45000 रुपए प्रति किलो भाव है इस बार चांदी के दाम