शिक्षा

स्कूल हमें खुश रहना क्यों नहीं सिखाते? IAS दिव्या मित्तल ने गिनाईं शिक्षा व्यवस्था की कमियां, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

IAS Divya Mittal on School Education: आईएएस दिव्या मित्तल ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि, स्कूल में हमें सफल होना तो सिखाया जाता है लेकिन, यह नहीं सिखाते कि खुश कैसे रहना है। अब उनका पोस्ट वायरल हो रहा है जिसने, सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

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May 18, 2026
IAS Divya Mittal Viral Post (Image- AI)

IAS Divya Mittal Viral Post: देश की शिक्षा व्यवस्था में क्या कमियां हैं इसे लेकर एक आईएएस अधिकारी की पोस्ट काफी चर्चा में है। आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई कर चुकीं आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने बताया है कि, हमारी स्कूली शिक्षा में किन अहम चीजों की भारी कमी है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, हम सालों तक यह तो सीखते हैं कि सफलता कैसे हासिल करनी है लेकिन एक भी दिन यह नहीं सीखते कि खुश कैसे रहना है।

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किसी ने नहीं बताया टूटे दिल का क्या करें

दिव्या मित्तल ने कहा कि, स्कूलों में स्टूडेंट्स को विज्ञान और गणित तो पढ़ाया जाता है लेकिन यह कभी नहीं सिखाया जाता कि तनाव दुख या दिल टूटने जैसी इमोशनल प्रॉब्लम्स से कैसे निपटा जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल अक्सर खामोशी को ही शांति मान लेते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि, कई लोग बड़े होने के बाद भी अपनी भावनाओं को सही तरीके से संभाल नहीं पाते हैं क्योंकि उन्हें बचपन में यह सब सिखाया ही नहीं गया।

स्कूलों में जरूर सिखानी चाहिए ये बातें

आईएएस अधिकारी ने उन जरूरी लाइफ स्किल्स की एक लिस्ट भी शेयर की है जिन्हें आज के समय में स्कूली पढ़ाई का इम्पोर्टेन्ट और कंपलसरी पार्ट होना चाहिए:

  • भावनाओं पर कंट्रोल: अपने गुस्से दुख और तनाव को सही तरीके से समझना और उन्हें संभालना।
  • गहरी बातचीत और रिश्ते: लोगों से सही ढंग से बात करना और रिश्तों में अपनी सीमाएं तय करना।
  • सही सोच-विचार: किसी भी बात को सीधे मान लेने के बजाय उस पर तर्क के साथ विचार करना।
  • पैसों की समझ: पैसों का सही मैनेजमेंट और बचत करना सीखना जिसे फाइनेंशियल लिटरेसी भी कहते हैं।
  • अकेलेपन का सामना करना: अकेले रहने पर परेशान होने के बजाय उस समय को कैसे बिताएं और अकेलेपन से कैसे निपटें।
  • सेल्फ डिसिप्लिन: खुद पर कंट्रोल रखना और अपने लक्ष्यों के प्रति गंभीर रहना।
  • लोगों को समझना: दूसरों के व्यवहार और सोच को पढ़ने की क्षमता विकसित करना।
  • मेंटल हेल्थ की देखभाल: अपने दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य को कैसे तंदुरुस्त रखें।
  • खुद को जानना: अपनी खूबियों और कमियों को पहचान कर खुद को बेहतर बनाना।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

दिव्या मित्तल की इस बात ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। कई यूजर्स और अभिभावकों का मानना है कि, आजकल स्कूल सिर्फ करियर बनाने और नंबर लाने की होड़ की जगह बन गए हैं। वहां जीवन जीने की असली कला और मुश्किलों का सामना करने का तरीका नहीं सिखाया जा रहा है जिसके कारण युवा तनाव का शिकार हो रहे हैं। स्कूलों में स्टूडेंट्स को मेंटल हेल्थ और जीवन जीने की कला जरूर सिखानी चाहिए।

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