Shubham Shabar, NEET UG 2025: ओडिशा के शुभम सबर ने दिन में मजदूरी और रात में पढ़ाई कर नीट यूजी 2025 पास किया है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस युवा की संघर्ष भरी कहानी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है। जानिए कैसे शुभम ने कठिन हालातों के बावजूद मेडिकल कॉलेज में जगह बनाई है।
Shubham Shabar, NEET UG 2025: साहिर लुधियानवी का एक पॉपुलर शेर है कि, हजार बर्क़ गिरे लाख आंधियां उठें, वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं। यह पंक्तियां ओडिशा के शुभम सबर पर बिल्कुल ठीक बैठती हैं। शुभम ने अपनी मेहनत और हौसलों के दम पर ईंट-गारे की मजदूरी के साथ-साथ पढ़ाई की और नीट यूजी 2025 की परीक्षा पास कर लिया है। यह उनके डॉक्टर बनने की पहली सीढ़ी है। शुभम की कहानी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन सकती है। चलिए जानते हैं शुभम के इस सफर के बारे में।
शुभम ओडिशा के खुर्दा जिले के एक छोटे से गांव मुदुलिडिया के रहने वाले हैं। उनका परिवार खेती-किसानी करके गुजर-बसर करता है। घर की आमदनी इतनी कम थी कि कभी-कभी दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। चार भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के कारण जिम्मेदारियां भी शुभम के कंधों पर ज्यादा थीं।
पढ़ाई का खर्च निकालना आसान नहीं था। इसके लिए शुभम बेंगलुरु गए और वहां एक निर्माण स्थल पर मजदूरी करने लगे। दिनभर ईंट-पत्थर ढोते और रात में थकान के बावजूद पढ़ाई करते। मजदूरी से जो भी पैसा बचता, वही उन्होंने कोचिंग और पढ़ाई पर खर्च किया था।
कक्षा 10 में शुभम ने 84% अंक हासिल किए और फिर भुवनेश्वर के बीजेबी कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। कक्षा 12 में 64% अंक प्राप्त करने के बाद उन्होंने तय किया कि वे डॉक्टर ही बनेंगे। इसी लक्ष्य के लिए उन्होंने नीट की तैयारी शुरू की। मुश्किल हालातों के बावजूद उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता पाई और ऑल इंडिया स्तर पर चयनित हो गए हैं।
शुभम को अब ब्रह्मपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एमबीबीएस के लिए प्रवेश मिल चुका है। यह उनके गांव और पंचायत के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि वे इलाके के पहले ऐसे छात्र होंगे जो डॉक्टर बनने की राह पर हैं।
शुभम कहते हैं, “मैंने अपने माता-पिता से वादा किया था कि डॉक्टर बनकर लौटूंगा। हमारी गरीबी ही मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी। मेरा सपना है कि मैं अपने गांव के लोगों को बेहतर इलाज और सुविधाएं दे सकूं।”
शुभम सबर की कहानी यह साबित करती है कि मुश्किल हालात इंसान को रोक नहीं सकते हैं। सही इरादा, लगन और मेहनत से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। मजदूरी करने वाला यह नवयुवक आज मेडिकल स्टूडेंट बन चुका है और आने वाले समय में अपने गांव का पहला डॉक्टर बनेगा।