Women Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक पर राजनीति गरमाई। हेमा मालिनी ने इसे महिलाओं के लिए दुखद दिन बताया। वहीं, कंगना रनौत ने बिल विफल होने पर नाराजगी जताते हुए इसे व्यक्तिगत हानि और शर्मनाक करार दिया।
Women Reservation Bill: बॉलीवुड एक्ट्रेस और सांसद हेमा मालिनी ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के अटके रहने पर निराशा व्यक्त करते हुए इसे "महिलाओं के लिए दुखद दिन" बताया। वहीं, एक्ट्रेस कंगना रनौत ने इस पर नाराजगी जताई और कांग्रेस पार्टी पर सभी हदें पार करने का आरोप लगाया।
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने पर बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया पर इसे "महिलाओं के लिए दुखद दिन" बताया। उन्होंने ट्वीट किया, "कल के संसद सत्र में महिला आरक्षण विधेयक अटक गया।" हेमा ने संसद में हुए इस घटनाक्रम पर निराशा व्यक्त की।
हेमा ने आगे कहा, "राष्ट्रीय मामलों में अधिक भागीदारी की उम्मीद कर रही महिलाओं के लिए यह एक दुखद दिन है।" इसे व्यक्तिगत रूप से निराशाजनक बताते हुए उन्होंने लिखा, "मतदान से ठीक पहले संसद में विधेयक के महत्व के बारे में बोलने के बाद मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत निराशा हुई।"
इसके साथ ही हेमा मालिनी ने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रात 8:30 बजे होने वाले संबोधन को सुनने का आग्रह भी किया था। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'मैं आप सभी से उनका संबोधन सुनने का अनुरोध करती हूं।" वहीं, अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने पर नाराजगी जताई। कंगना ने इसे अपने लिए "व्यक्तिगत क्षति" बताया। उन्होंने इस स्थिति को शर्मनाक कृत्य बताया। "आज इससे ज्यादा दुखद और दर्दनाक कुछ भी नहीं हुआ है।"
NAI से बात करते हुए एक्ट्रेस कंगना रनौत ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने पर नाराजगी जताई। कंगना ने इसे अपने लिए "व्यक्तिगत क्षति" बताया। उन्होंने इसको शर्मनाक कृत्य करार दिया। उन्होंने कहा, "आज से ज्यादा दुखद और पीड़ादायक कुछ भी नहीं हुआ है।" भाजपा सांसद ने कांग्रेस पार्टी पर "सभी हदें पार करने" और भारत की बेटी का मनोबल गिराने का आरोप लगाया।
जानकारी के लिए बता दें कि महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) का उद्देश्य राजनीति में लैंगिक प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना है। हालांकि, विधेयक का नया संस्करण लोकसभा में पारित नहीं हो सका क्योंकि इसे संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। हालांकि, इसके पक्ष में विपक्ष की तुलना में अधिक मत पड़े, फिर भी यह जरूरी बहुमत की लिमिट को पार नहीं कर सका, जिसके कारण सदन में यह विधेयक पास नहीं हो पाया।