
Adenoid Cystic Carcinoma: अगर आपके मुंह, गले या जबड़े के आसपास लंबे समय से कोई गांठ बनी हुई है, निगलने में परेशानी हो रही है या चेहरे के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस होता है, तो इसे सिर्फ सामान्य सूजन या संक्रमण समझकर नजरअंदाज न करें। हालांकि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में यह एडेनोइड सिस्टिक कार्सिनोमा (ACC) नाम के एक दुर्लभ कैंसर का संकेत हो सकती है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिसऑर्डर्स (NORD) के अनुसार, Adenoid Cystic Carcinoma एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है, जो सबसे अधिक लार ग्रंथियों (Salivary Glands) में विकसित होता है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन आसपास की नसों और ऊतकों तक फैल सकता है। इसलिए इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
एडेनोइड सिस्टिक कार्सिनोमा (ACC) एक दुर्लभ कैंसर है, जो शरीर की स्राव (Secretions) बनाने वाली ग्रंथियों में शुरू हो सकता है। यह सबसे अधिक लार ग्रंथियों में पाया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में नाक, साइनस, गले, श्वासनली (ट्रेकिया), फेफड़ों या आंसू ग्रंथियों में भी विकसित हो सकता है। NIH के अनुसार, यह कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआती चरण में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं।
NORD के अनुसार, Adenoid Cystic Carcinoma एक दुर्लभ कैंसर है और यह किसी भी उम्र में हो सकता है, हालांकि अधिकतर मामले वयस्कों में देखे जाते हैं। फिलहाल इसके स्पष्ट कारण पूरी तरह ज्ञात नहीं हैं।
डॉक्टर लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर आगे की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें बायोप्सी (ऊतक का नमूना लेकर जांच) एमआरआई (MRI) सीटी स्कैन (CT Scan) और अन्य इमेजिंग जांच शामिल हो सकते हैं। बायोप्सी से ही कैंसर की पुष्टि की जाती है।
इलाज कैंसर की जगह, आकार और फैलाव पर निर्भर करता है। इसमें सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कुछ मामलों में अन्य उपचार विकल्प शामिल हो सकते हैं। उपचार की योजना हमेशा कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) की सलाह के अनुसार बनाई जाती है।
यदि आपको मुंह, गले या जबड़े में लंबे समय से गांठ हो, चेहरे में लगातार सुन्नपन या झुनझुनी महसूस हो और निगलने या बोलने में परेशानी हो साथ ही कई सप्ताह तक दर्द बना रहे तो बिना देर किए ईएनटी विशेषज्ञ या डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।