
Ambulance New Rule 2026 In India :"एंबुलेंस के देरी से पहुंचने पर मरीज की मौत…, मरीज को खाट या ऑटोरिक्शा पर लेकर अस्पताल पहुंचे", इस तरह की खबरें आए दिन पढ़ने को मिलती हैं। इसलिए, सरकार ने इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आरोग्य सेतु 2.0 लॉन्च करने के साथ ही देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा (NAS), 2026 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं।
अब एंबुलेंस सेवा सही समय पर मदद के लिए पहुंचेगी। आइए, राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा की नई गाइडलाइन की मुख्य बातों को विस्तार से समझते हैं।
पीआईबी (PIB) के मुताबिक, "ये दिशानिर्देश पहली बार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एम्बुलेंस सेवाओं की योजना बनाने, संचालन करने और निगरानी करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन चिकित्सा परिवहन सुनिश्चित करना है।"
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर लिखा, "एम्बुलेंस सेवा (NAS) परिचालन दिशानिर्देश, 2026 देशभर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य हर नागरिक तक समय पर गुणवत्तापूर्ण जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।"
उन्होंने इसके बारे में निम्नलिखित बिंदु साझा किए हैं, जिन्हें आम लोगों को जानना चाहिए:
नई गाइडलाइन में यह भी बताया गया है कि एम्बुलेंस हेल्पलाइन पर कॉल आने पर 20 सेकेंड के भीतर 95 प्रतिशत कॉल उठाई जानी चाहिए। अगर कोई कॉल नहीं उठ पाती है या ड्रॉप हो जाती है, तो सेंटर ऐसी हर कॉल को फिर से कनेक्ट करेगा, ताकि मरीज को समय पर आपातकालीन मेडिकल सेवा मिल सके।
प्राइवेट एंबुलेंस के लिए भी यही नियम लागू होंगे। अगर वे इन नियमों पर खरे उतरते हैं, तो ही उन्हें इस सेवा से जोड़ा जाएगा। प्राइवेट एंबुलेंस सेवा के लिए हर जिले में एक कमेटी गठित होगी, जो इन्हें जोड़ने के साथ-साथ इन पर निगरानी रखने का काम भी करेगी।
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) का एक सामान्य अनुमान है कि मेडिकल इमरजेंसी से जुड़ी 90 प्रतिशत मौतों को समय पर इलाज देकर रोका जा सकता है। भारत के संदर्भ में, मेडिकल जर्नल्स और सरकारी आंकड़े यह साबित करते हैं कि अगर इमरजेंसी रिस्पांस टाइम (एंबुलेंस सेवा) को सुधारा जाए, तो हर साल सड़क दुर्घटनाओं और हार्ट अटैक या स्ट्रोक से होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौतों (लाखों जानें) को रोका जा सकता है।