
Ankylosing Spondylitis Symptoms: आजकल की भागदौड़ में कमर दर्द होना बहुत आम बात हो गई है। अक्सर हम सोच लेते हैं कि गलत तरीके से बैठने, दिनभर कुर्सी पर पड़े रहने या थकान की वजह से ऐसा हो रहा है। लेकिन अगर आपकी उम्र 40 से कम है और यह दर्द पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा, तो इसे सिर्फ थकान मानकर भूलने की गलती न करें। मेयो क्लिनिक के मुताबिक, महीनों तक बने रहने वाला यह कमर दर्द एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing Spondylitis) का इशारा हो सकता है। इसे एक्सियल स्पोंडिलोआर्थराइटिस भी कहते हैं। यह रीढ़ की हड्डी में होने वाली एक तरह की सूजन की बीमारी है, जो मुख्य रूप से पीठ की हड्डियों को नुकसान पहुंचाती है। अगर यह सूजन छाती की पसलियों और जोड़ों तक पहुंच जाए, तो इंसान को गहरी सांस लेने में भी खिंचाव और परेशानी महसूस होने लगती है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी आखिर क्या है और इसे समय रहते पहचानना क्यों जरूरी है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस रीढ़ की हड्डी में होने वाला एक तरह का गठिया (Arthritis) या सूजन है। इसमें रीढ़ के जोड़ों में लगातार सूजन बनी रहती है। अगर समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो धीरे-धीरे रीढ़ की हड्डियां आपस में जुड़ने (फ्यूज होने) लगती हैं। इससे पीठ का लचीलापन खत्म हो जाता है, रीढ़ कड़क हो जाती है और इंसान थोड़ा आगे की तरफ झुककर चलने लगता है। यहां तक कि सीधे खड़े होने या मुड़ने में भी बड़ी तकलीफ होती है। 40 साल से कम उम्र और पुरूषों में इसके होने का रिस्क ज्यादा होता है।
इस बीमारी का दर्द अचानक नहीं आता, बल्कि धीरे-धीरे शुरू होता है और वक्त के साथ बढ़ता जाता है। अगर आपको नीचे दी गई परेशानियां आ रही हैं, तो थोड़ा संभल जाने की जरूरत है;
1. इम्यून सिस्टम का भटक जाना (Autoimmune Reaction)- इसमें हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता), जो हमें बीमारियों से बचाता है, वही गलती से हमारी ही रीढ़ की हड्डियों और जोड़ों को नुकसान पहुंचाने लगता है।
2. जीन्स और परिवार का असर (Genetics)- जिन लोगों के शरीर में HLA-B27 नाम का जीन होता है, उनमें यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो आगे भी इसके होने की आशंका बनी रहती है।
अगर आपकी उम्र 40 से कम है और सुबह उठते ही कमर में कड़कपन या तेज दर्द रहता है, जो लेटने से बढ़ता है और थोड़ा चलने-फिरने से कम होता है तो बिना देरी किए किसी जोड़ व गठिया रोग विशेषज्ञ (Rheumatologist) को दिखाएं। ब्लड टेस्ट और X-Ray या MRI से इसका तुरंत पता चल जाता है। सही समय पर दवाएं, फिजियोथेरेपी और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इसके दर्द पर काबू पाया जा सकता है और रीढ़ की हड्डी को कड़क होकर जुड़ने से बचाया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।