
ASD Closure: दिल में छेद होना एक ऐसी स्थिति है जिसे सुनकर कोई भी घबरा जाता है! अक्सर बच्चों के जन्म के समय इस बीमारी का पता चलता है, लेकिन कई बार बड़े होने पर भी इसके लक्षण सामने आते हैं। दिल के ऊपरी हिस्सों के बीच होने वाले इस छेद को एएसडी यानी एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (Atrial Septal Defect) कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, हर छेद के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं होती। आइए समझते हैं कि एएसडी क्या है।
सीडीसी (CDC) के अनुसार, एएसडी एक जन्मजात हृदय दोष है। हमारा दिल चार हिस्सों (चेंबर्स) में बंटा होता है, दो ऊपरी हिस्से और दो निचले हिस्से। ऊपरी दोनों हिस्सों के बीच में एक दीवार होती है, जो साफ और गंदे खून को आपस में मिलने से रोकती है। जब जन्म से ही इस दीवार में कोई छेद रह जाता है, तो उसे एएसडी कहते हैं। इस छेद की वजह से फेफड़ों से आया साफ खून वापस गंदे खून वाले हिस्से में लीक होने लगता है। नतीजा यह होता है कि दिल और फेफड़ों को जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिसर्च बताती है कि नहीं, हर किसी को इसकी जरूरत नहीं होती। जब बच्चा पैदा होता है, तो कई बार उसके दिल में छोटा सा छेद होता है। अधिकांश मामलों में, बच्चे के बढ़ने के साथ-साथ यह छोटा छेद कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप भर जाता है। ऐसे मामलों में किसी इलाज की जरूरत नहीं होती, बस डॉक्टर समय-समय पर इसकी जांच करते रहते हैं।
जब दिल का छेद बड़ा हो और अपने आप बंद न हो, तब डॉक्टरों को इसे बंद करने का फैसला लेना पड़ता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, निम्न स्थितियों में ASD Closure बहुत जरूरी हो जाता है;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।