Chewing Gum Cancer Risk: यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया की नई रिसर्च में दावा, खास च्यूइंग गम मुंह और गले के कैंसर से जुड़े खतरनाक कीटाणुओं को कम कर सकती है। जानिए पूरा सच और एक्सपर्ट की राय।
Chewing Gum Cancer Risk: आज के समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को लेकर नई-नई खोज सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में एक चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि चबाने वाली गम (च्यूइंग गम) भी मुंह और गले के कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है।
पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय की रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि खास तरह की तैयार की गई गम मुंह में मौजूद खतरनाक कीटाणुओं को कम कर सकती है। इस शोध का नेतृत्व Henry Daniell ने किया।
यह सामान्य गम नहीं है। इसे एक खास प्रकार की फलियों (लैब्लैब बीन्स) से बनाया गया है, जिसमें FRIL नाम का एक प्रोटीन पाया जाता है। यह प्रोटीन शरीर में हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है। रिसर्च में सामने आया कि यह गम एचपीवी (एक खतरनाक वायरस) को काफी हद तक कम कर देती है। साथ ही कुछ हानिकारक बैक्टीरिया भी लगभग खत्म हो जाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यह मुंह के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान नहीं पहुंचाती है।
मुंह और गले का कैंसर (HNSCC) एक गंभीर बीमारी है, जो अक्सर देर से पता चलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार एचपीवी संक्रमण इस कैंसर का एक बड़ा कारण है। कुछ बैक्टीरिया इस बीमारी को और खतरनाक बना देते हैं। अगर इन कीटाणुओं को समय रहते कम कर दिया जाए, तो बीमारी का खतरा भी कम हो सकता है।
अभी यह शोध शुरुआती चरण में है। यानी इसे सीधे इलाज नहीं कहा जा सकता है। लेकिन भविष्य में यह एक आसान और सस्ता उपाय बन सकता है। इसे इलाज के साथ सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि कैंसर के इलाज आज के समय में काफी महंगे और जटिल हैं। ऐसे में अगर एक साधारण गम से मदद मिलती है, तो यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।
बाजार में मिलने वाली सामान्य गम इससे अलग होती है। इसे खुद से इलाज मानकर इस्तेमाल न करें। किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।