Dipika Kakar Cancer: दीपिका कक्कड़ ने बताया कि एफएपीआई स्कैन की मदद से डॉक्टरों ने कैंसर की सही स्थिति का पता लगाया। जानिए यह आधुनिक जांच तकनीक कैसे काम करती है और क्यों मानी जा रही है खास।
Dipika Kakar Liver Tumor: टीवी अभिनेत्री दीपिका कक्कर (Dipika Kakar) ने हाल ही में अपने कैंसर इलाज को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने उनके शरीर में कैंसर कितना फैला है, यह जानने के लिए “एफएपीआई स्कैन” कराया था। भारती सिंह (Bharti Singh) और Haarsh Limbachiyaa के पॉडकास्ट में दीपिका ने कहा कि यह जांच डॉक्टरों को यह समझने में मदद करती है कि कैंसर सिर्फ ट्यूमर तक सीमित है या शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल चुका है। दीपिका ने बताया, “मेरे मामले में कैंसर सिर्फ ट्यूमर तक था। एफएपीआई स्कैन में शरीर के बाकी हिस्सों में कैंसर कोशिकाएं नहीं दिखीं, इसलिए डॉक्टरों ने लिवर का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा निकालकर ट्यूमर हटा दिया।”
Dr Puneet Gupta के मुताबिक, एफएपीआई स्कैन एक आधुनिक जांच तकनीक है, जो कैंसर की सही स्थिति समझने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि अगर जांच में कैंसर सिर्फ ट्यूमर तक सीमित दिखता है, तो इसका मतलब अक्सर बीमारी शुरुआती अवस्था में है और ऑपरेशन का फायदा ज्यादा हो सकता है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ स्कैन देखकर किसी मरीज की पूरी स्थिति तय नहीं की जा सकती। मरीज की सेहत, ट्यूमर का प्रकार और शरीर की हालत भी बहुत मायने रखती है।
Dr Miglani बताते हैं कि सामान्य पीईटी स्कैन शरीर में शुगर की गतिविधि को देखता है, जबकि एफएपीआई स्कैन कैंसर से जुड़े खास सेल्स को पहचानता है। इस वजह से जांच में ट्यूमर ज्यादा साफ दिखाई देता है और डॉक्टरों को कैंसर की सही जगह समझने में आसानी होती है। खासकर उन मामलों में, जहां सामान्य स्कैन उतना असरदार साबित नहीं होता।
दीपिका ने बताया कि उनके लिवर का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा ऑपरेशन में निकालना पड़ा। यह सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक लिवर शरीर का ऐसा अंग है जो खुद को दोबारा ठीक करने की क्षमता रखता है। डॉ. मिगलानी के अनुसार, लिवर की कोशिकाएं तेजी से दोबारा बनती हैं और समय के साथ लिवर अपना आकार और कामकाज काफी हद तक वापस पा सकता है। हालांकि रिकवरी पूरी तरह मरीज की सेहत और बचे हुए लिवर की क्षमता पर निर्भर करती है। ऑपरेशन के बाद संक्रमण, खून बहना या कुछ समय के लिए लिवर कमजोर होने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि एफएपीआई स्कैन काफी आधुनिक तकनीक है, लेकिन इसके बावजूद शरीर में बहुत छोटे स्तर पर मौजूद कैंसर कोशिकाएं कभी-कभी छिपी रह सकती हैं। इसी वजह से डॉक्टर ऑपरेशन के बाद भी मरीजों की लगातार जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरी थेरेपी भी देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एफएपीआई स्कैन कैंसर की पहचान और इलाज में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे डॉक्टरों को बीमारी की सही स्थिति समझने में पहले से ज्यादा मदद मिल रही है।