स्वास्थ्य

Dysphagia: खाना निगलने की समस्या से जुड़ी है यह बीमारी, रिसर्च से जगी राहत की उम्मीद

Dysphagia Cause: खाना निगलने में दिक्कत, गले में खाना अटकना या बार-बार खांसी आना Dysphagia के संकेत हो सकते हैं। नेचर की नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका खोजा है, जिससे सब्जियों को निगलने में आसान बनाया जा सकता है।
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May 23, 2026
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युवती के गले में कुछ अटका हुआ- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Dysphagia Treatment: क्या आपके घर में कोई खाना खाते समय बार-बार खांसने लगता है? या ऐसा लगता है कि खाना गले में अटक रहा है? कई लोग इसे उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह डिस्फेजिया (Dysphagia) का संकेत हो सकता है। अच्छी बात यह है कि अब वैज्ञानिक ऐसे खाने पर काम कर रहे हैं जो निगलने में आसान हो और पोषण भी पूरा दे सके। हाल में प्रकाशित एक स्टडी में ऐसा तरीका सामने आया है जिसमें सब्जियों को खास प्रक्रिया से नरम बनाकर निगलना आसान किया गया।

नई स्टडी में क्या मिला?

हाल में नेचर जर्नल में प्रकाशित रिसर्च में वैज्ञानिकों ने देखा कि कुछ सब्जियों खासकर बर्डॉक (Burdock) (जड़ वाली सब्जी) को एक खास कीलेटिंग एजेंट (chelating agent) से ट्रीट करके उनकी कठोरता कम की जा सकती है। अच्छी बात यह रही कि सब्जी की शेप और दिखावट काफी हद तक बनी रही, लेकिन उसे निगलना आसान हो गया। रिसर्च का मकसद ऐसे मरीजों के लिए खाना तैयार करना था जिन्हें निगलने में परेशानी होती है और जिनके लिए सख्त खाना जोखिम बन सकता है।

क्या होती है Dysphagia?

डिस्फेजिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को खाना या पानी निगलने में परेशानी होती है। कई बार खाना गले में अटक जाता है, खांसी आने लगती है या खाने के बाद घुटन जैसा महसूस होता है। यह समस्या अक्सर बुजुर्गों, स्ट्रोक के मरीजों, पार्किंसन, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों या गले की कमजोरी वाले लोगों में ज्यादा देखी जाती है।

Dysphagia में कैसे काम आएगी ये रिसर्च?

भविष्य में ऐसे फूड विकल्प तैयार हो सकते हैं जो देखने में सामान्य खाना लगें लेकिन निगलने में आसान हों। अभी तक डिस्फेजिया मरीजों को अक्सर मैश किया हुआ या बहुत नरम खाना दिया जाता है, जो देखने और स्वाद में कई बार पसंद नहीं आता। नई तकनीक इस परेशानी को कम कर सकती है।

क्या भारत में ये पायी जाती है?

बर्डॉक भारत में बहुत आम सब्जी नहीं है, लेकिन ये सब्जी यहां मिलती है। भारत में इसे पर बर्डॉक रूट ही कहा जाता है। कुछ लोग इसे जंगली गोभी की जड़ या कांटेदार पौधे की जड़ जैसा वर्णन करके बताते हैं। यह एक लंबी, भूरे रंग की जड़ होती है, दिखने में थोड़ी पतली मूली या शकरकंद जैसी लग सकती है। इसे सूप, सब्जी, अचार और हर्बल उपयोग में लिया जाता है। इसकी खरीदारी और सेवन किसी जानकार के सलाह के आधार पर ही करें।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

  • खाना गले में फंसना।
  • निगलते समय दर्द या परेशानी।
  • बार-बार खांसी आना।
  • पानी पीते समय भी दिक्कत।
  • अचानक वजन कम होना।
  • खाते समय घुटन महसूस होना।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
25 May 2026 12:30 pm
Published on:
23 May 2026 04:56 pm