स्वास्थ्य

Alzheimer Early Detection: सालों पहले पकड़ में आएगा अल्जाइमर, दिमाग डैमेज होने से पहले ही आंखों में दिखने लगते हैं ये संकेत

Alzheimer Early Detection: नई रिसर्च के मुताबिक आंखों की रेटिना में दिख सकते हैं अल्जाइमर के शुरुआती संकेत। साधारण आई टेस्ट से सालों पहले हो सकता है पता।
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Feb 21, 2026
Alzheimer Early Detection
Alzheimer Early Detection (photo- gemini ai)

Alzheimer Early Detection: अल्जाइमर जैसी गंभीर दिमागी बीमारी का पता अक्सर तब चलता है, जब याददाश्त पर असर शुरू हो चुका होता है। लेकिन अब एक नई रिसर्च कहती है कि इस बीमारी को बहुत पहले ही पकड़ा जा सकता है, और वो भी साधारण आंखों की जांच से। जी हां, वैज्ञानिकों के मुताबिक हमारी आंखों का एक खास हिस्सा अल्जाइमर के शुरुआती संकेत दिखा सकता है, जब दिमाग को अभी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ होता।

आंखें बता सकती हैं दिमाग की हालत

अमेरिका के Houston Methodist Hospital के वैज्ञानिकों ने पाया कि आंख की रेटिना का बाहरी हिस्सा, जिसे पेरिफेरल रेटिना कहते हैं, अल्जाइमर के शुरुआती संकेत दिखा सकता है। स्टडी के लेखक Stephen Wong के अनुसार, अब तक ज्यादातर आंखों की जांच में डॉक्टर रेटिना के बीच वाले हिस्से को देखते हैं। लेकिन असली शुरुआती बदलाव आंख के किनारों पर होते हैं, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था। उनका कहना है कि अगर इन बदलावों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी का इलाज याददाश्त कमजोर होने से पहले ही शुरू किया जा सकता है।

आंख और दिमाग का गहरा कनेक्शन

वैज्ञानिक पहले भी बता चुके हैं कि आंखों की रेटिना में जमा होने वाला एमिलॉइड प्रोटीन दिमाग में जमा होने वाले उसी प्रोटीन से जुड़ा होता है, जो अल्जाइमर की पहचान माना जाता है। मतलब साफ है आंखों में होने वाले बदलाव दिमाग में चल रही बीमारी की झलक दिखा सकते हैं।

स्टडी में क्या नया मिला?

यह रिसर्च Journal of Alzheimer's Disease में प्रकाशित हुई है। इसमें चूहों पर किए गए प्रयोगों से पता चला कि रेटिना की सपोर्ट करने वाली कोशिकाएं, जिन्हें मुलर ग्लिया कहते हैं, बीमारी के बहुत शुरुआती चरण में ही बदलने लगती हैं। स्टडी की पहली लेखक Glori Das के मुताबिक, आंख के बाहरी हिस्से में ऐसी सपोर्ट कोशिकाएं ज्यादा होती हैं। इसलिए वहां बीमारी के शुरुआती संकेत ज्यादा साफ दिखाई देते हैं।

एक खास प्रोटीन भी देता है संकेत

रिसर्च में यह भी पता चला कि Aquaporin-4 नाम का प्रोटीन बीमारी की शुरुआत में बढ़ने लगता है। यह प्रोटीन दिमाग से कचरा साफ करने में मदद करता है। जब इसकी मात्रा बढ़ती है, तो रेटिना के बाहरी हिस्से में तनाव और कोशिकाओं के आकार में बदलाव दिखाई देने लगते हैं। यह संकेत होता है कि शरीर अंदर ही अंदर संतुलन बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत कर रहा है।

भविष्य में बदल सकती है जांच की प्रक्रिया

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ये खोज आगे भी सही साबित होती है, तो साधारण आई टेस्ट से ही अल्जाइमर का खतरा सालों पहले पता चल सकता है। इससे न सिर्फ जल्दी इलाज शुरू होगा, बल्कि नई दवाओं के विकास में भी मदद मिल सकती है।

Updated on:
21 Feb 2026 12:36 pm
Published on:
21 Feb 2026 12:36 pm
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