
बालों के अत्यधिक झड़ने और गंजेपन की समस्या होने पर शुरुआती स्टेज में ही डर्मेटोलॉजिस्ट से सही जांच और इलाज कराना जरूरी है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Alopecia Symptoms: सुबह उठकर जब आप कंघी करते हैं और कंघी में ढेर सारे टूटे हुए बाल फंसे देखते हैं, तो दिल में एक अनजाना डर बैठ जाता है। शुरुआत में लगता है कि शायद शैम्पू बदलने या मौसम के असर से ऐसा हो रहा है। लेकिन जब धीरे-धीरे सिर के बीच का हिस्सा या माथे के पास के बाल पतले होने लगते हैं, तब समझ आता है कि यह समस्या केवल बाल झड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंजेपन (Baldness या Alopecia) की ओर इशारा कर रही है। आमतौर पर हर इंसान के रोजाना 50 से 100 बाल झड़ना बिल्कुल सामान्य माना जाता है, क्योंकि उनकी जगह नए बाल आ जाते हैं। लेकिन जब बाल झड़ने की रफ्तार नए बाल उगने की प्रक्रिया से तेज हो जाती है, तो सिर पर खालीपन नजर आने लगता है। आइए जानते हैं कि गंजापन क्यों होता है, इसके पीछे क्या मुख्य कारण हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
जॉन्स हॉपकिंस के अनुसार, सिर की त्वचा (Scalp) से बहुत अधिक मात्रा में बाल झड़ने लगते हैं और नए बाल उगना पूरी तरह बंद या बेहद पतले हो जाते हैं, तो उस स्थिति को गंजापन या ऐलोपेसिया कहा जाता है। यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकती है, लेकिन दोनों में इसके दिखने का पैटर्न थोड़ा अलग होता है, इसमें माथे के दोनों तरफ से बाल पीछे हटने लगते हैं (M-सूरत बनने लगती है) या सिर के ऊपरी हिस्से (क्राउन एरिया) से बाल पूरी तरह गायब हो जाते हैं। महिलाओं में आमतौर पर सिर के बीच की मांग चौड़ी होने लगती है और पूरे सिर के बाल धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं, हालांकि उनका माथा पुरुषों की तरह पीछे नहीं खिसकता।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, बाल झड़ने और गंजापन आने के पीछे कई शारीरिक, आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़े कारण होते हैं;
गंजेपन का सबसे बड़ा और आम कारण जेनेटिक्स यानी पारिवारिक इतिहास है। इसे मेडिकल भाषा में 'एंड्रोजेनेटिक ऐलोपेसिया' (Androgenetic Alopecia) कहते हैं। अगर आपके पिता, दादा या नाना के सिर पर बाल कम थे, तो बहुत अधिक संभावना है कि उम्र बढ़ने के साथ आपको भी यह समस्या हो सकती है। यह समस्या उम्र के साथ धीरे-धीरे और एक तय पैटर्न में बढ़ती है।
शरीर में हॉर्मोन के उतार-चढ़ाव का सीधा असर हमारे बालों की जड़ों (Hair Follicles) पर पड़ता है। पुरुषों में DHT (Dihydrotestosterone) नाम का हॉर्मोन बालों की जड़ों को सिकोड़ देता है, जिससे बाल पतले होकर गिरने लगते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था, डिलीवरी, मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होना) या थायराइड और PCOD की वजह से हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।
अगर आप किसी बड़ी शारीरिक या मानसिक बीमारी से गुजरे हैं, कोई मेजर सर्जरी हुई है, या लंबे समय से बहुत ज्यादा स्ट्रेस में हैं, तो आपके बाल तेजी से झड़ सकते हैं। इसे 'टेलोजेन एफ्लुवियम' कहते हैं। इसमें अचानक से बहुत सारे बाल आराम की अवस्था (Telogen Phase) में चले जाते हैं और कंघी या धोते समय गुच्छों में बाहर आने लगते हैं।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और जंक फूड के ज्यादा सेवन से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। अगर शरीर में प्रोटीन, आयरन (हीमोग्लोबिन), विटामिन D, जिंक या बी-कॉम्प्लेक्स की कमी हो जाए, तो बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और बाल टूटने लगते हैं।
कैंसर की कीमोथेरेपी, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, गठिया (Arthritis) और दिल की बीमारियों के लिए ली जाने वाली कुछ हैवी दवाओं के साइड इफेक्ट से भी बाल झड़ने लगते हैं। इसके अलावा, एलोपेसिया एरीटा (Alopecia Areata) नाम की ऑटोइम्यून बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही बालों की जड़ों पर हमला कर देता है, जिससे गोल-गोल पैच में बाल गायब हो जाते हैं।
बालों में बार-बार कड़े केमिकल वाले हेयर कलर लगाना, स्मूथनिंग, स्ट्रेटनिंग कराना या बालों को बहुत कसकर बांधना (जैसे बहुत टाइट पोनीटेल बनाना) भी बालों को नुकसान पहुंचाता है। लगातार खिंचाव के कारण बालों की जड़ें परमानेंट बंद हो जाती हैं।
यदि आपको लगता है कि कंघी करते समय या नहाते वक्त आपके बाल बहुत ज्यादा गिर रहे हैं, सिर पर कोई खाली पैच (Patch) दिख रहा है या माथे के पास से बाल पीछे हट रहे हैं, तो बिना देर किए किसी त्वचा व बाल रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) से सलाह लें। सही समय पर सही इलाज शुरू करने से आपके प्राकृतिक बालों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
Updated on:
01 Oct 2026 12:52 pm
Published on:
01 Oct 2026 12:52 pm
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