
वजन कम होना और पीलिया Pancreatic Neuroendocrine Tumor का संकेत हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Pancreatic Neuroendocrine Tumor: अक्सर पेट में हल्का-फुल्का दर्द होना, बिना किसी डाइटिंग के अचानक वजन घटने लगना या फिर आंखों और त्वचा में पीलापन आ जाना जैसी समस्याओं को हम गैस्ट्रिक, गैस या सामान्य कमजोरी समझकर टाल देते हैं। बाजार से कोई एंटासिड या गैस की दवा खाकर हम सोच लेते हैं कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार लौट रहे हैं या लंबे समय से बने हुए हैं, तो इन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेडिकल की दुनिया में यह स्थिति पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय से जुड़ी एक खास और दुर्लभ बीमारी का संकेत हो सकती है, जिसे पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (Pancreatic Neuroendocrine Tumor - pNETs) कहा जाता है। आइए समझते हैं कि यह ट्यूमर क्या होता है, इसके लक्षण कैसे पहचानें और समय रहते इसका पता लगाना क्यों जरूरी है।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, पेट के ऊपरी हिस्से में पीछे की तरफ एक अंग होता है जिसे पैंक्रियाज (अग्न्याशय) कहते हैं। इसका काम शरीर के लिए पाचक रस बनाना और इंसुलिन जैसे जरूरी हार्मोन्स का रिसाव करना होता है जो हमारे ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखते हैं। अग्न्याशय के अंदर कुछ खास तरह की न्यूरोएंडोक्राइन कोशिकाएं (Neuroendocrine Cells) होती हैं, जो नर्वस सिस्टम से सिग्नल लेकर शरीर में हार्मोन्स बनाने और उन्हें खून में रिलीज करने का काम करती हैं। जब इन कोशिकाओं में अनियंत्रित तरीके से गांठ या ट्यूमर बनने लगता है, तो इसे 'पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' कहते हैं। ये ट्यूमर दो तरह के हो सकते हैं;
क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि जब यह ट्यूमर बढ़ता है या हार्मोन्स का असंतुलन पैदा करता है, तो शरीर में कई तरह के संकेत दिखने लगते हैं;
वैसे तो ज्यादातर मामलों में यह ट्यूमर बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक विकसित हो जाता है। लेकिन कुछ जेनेटिक और आनुवंशिक स्थितियां ऐसी हैं जो इसके खतरे को बढ़ा देती हैं, जैसे कि मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 1 (MEN1)। अगर परिवार में किसी को यह जेनेटिक समस्या रही हो, तो अगली पीढ़ी में इस ट्यूमर के पनपने का जोखिम अधिक रहता है। इसके अलावा बढ़ती उम्र भी इसका एक बड़ा कारक है।
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से पेट में दर्द, पीलिया या वजन घटने की दिक्कत है, तो डॉक्टर कुछ जरूरी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं:
इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर का साइज कितना है और वह कितना फैला है। अगर ट्यूमर शुरुआती स्टेज में है और एक ही जगह पर है, तो ऑपरेशन (Surgery) करके ट्यूमर को बाहर निकाल दिया जाता है। हार्मोन्स के रिसाव को रोकने और ट्यूमर की ग्रोथ को धीमा करने के लिए खास तरह के इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं। अगर ट्यूमर शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे लिवर) तक फैल चुका हो, तो इसे कंट्रोल करने के लिए एडवांस्ड थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।
Published on:
30 Sept 2026 05:08 pm
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