
Fatty Liver Symptoms: फैटी लिवर आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। खराब खानपान, बढ़ता वजन, डायबिटीज और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता, इसलिए कई लोगों को तब पता चलता है जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है।
Mayo Clinic और NHS के अनुसार, हालांकि शुरुआती फैटी लिवर अक्सर "साइलेंट" होता है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान बनी रहती है, तो यह फैटी लिवर का शुरुआती संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर की ऊर्जा पर असर पड़ सकता है।
लिवर पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। Mayo Clinic के अनुसार कुछ लोगों को इस हिस्से में भारीपन, दबाव या हल्का दर्द महसूस हो सकता है।
कई मरीज बताते हैं कि उन्हें सामान्य काम करने में भी पहले से ज्यादा थकावट महसूस होने लगती है। यह लिवर की कार्यप्रणाली में बदलाव का संकेत हो सकता है।
फैटी लिवर का संबंध अक्सर मोटापे और विशेष रूप से पेट की अतिरिक्त चर्बी से होता है। यदि कमर का आकार लगातार बढ़ रहा है, तो इसे केवल वजन बढ़ना मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अक्सर फैटी लिवर का पता किसी अन्य कारण से कराए गए ब्लड टेस्ट में चलता है। यदि ALT और AST जैसे लिवर एंजाइम बढ़े हुए मिलते हैं, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
NHS के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों में फैटी लिवर का जोखिम अधिक होता है। इसलिए यदि शुगर कंट्रोल बिगड़ रहा है, तो लिवर की जांच भी जरूरी हो सकती है।
यदि फैटी लिवर सूजन और लिवर डैमेज तक पहुंच जाए, तो कुछ लोगों में त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), पैरों में सूजन, पेट में पानी भरना या त्वचा में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ये आमतौर पर शुरुआती नहीं बल्कि उन्नत अवस्था के संकेत होते हैं।
फैटी लिवर की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जा सकती। इसके लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, FibroScan या अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।