
Glandular Fever Cause Hindi: अगर आपको लगातार बुखार है, गले में भारी दर्द है और हर वक्त ऐसी थकान रहती है जो सोने के बाद भी ठीक नहीं होती, तो इसे मामूली फ्लू (सर्दी-खांसी) समझने की गलती न करें। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, ये सारे लक्षण ग्लैंडुलर फीवर के हो सकते हैं, जिसे मोनो या किसिंग डिजीज (Kissing Disease) भी कहा जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, विश्व में 95% से ज्यादा वयस्क इसके संपर्क में आ चुके हैं।
आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्या है और इसका इलाज कैसे होता है।
ग्लैंडुलर फीवर एक तरह का वायरल इन्फेक्शन है जो ज्यादातर एपस्टीन-बार वायरस (EBV) नाम के वायरस की वजह से होता है। यह बीमारी किसी भी उम्र के इंसान को हो सकती है, लेकिन स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों और टीनेजर्स (बड़े बच्चों) में यह सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह वायरस आपस में थूक (saliva) के जरिए फैलता है, इसलिए इसे किसिंग डिजीज का नाम मिला है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ चूमने से फैलता है। अगर आप किसी बीमार इंसान का जूठा पानी पीते हैं, उसके साथ चम्मच, कटोरी या टूथब्रश शेयर करते हैं, या उसके खांसने और छींकने के दौरान नजदीक रहते हैं, तो भी यह वायरस आपके अंदर पहुंच सकता है।
जब यह वायरस शरीर में जाता है, तो लगभग 4 से 6 हफ्ते बाद इसके लक्षण दिखना शुरू होते हैं;
यह एक वायरल इन्फेक्शन है, इसलिए इस पर कोई भी एंटीबायोटिक दवा असर नहीं करती (एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरिया पर काम करती हैं)। ग्लैंडुलर फीवर को ठीक करने की कोई खास दवा नहीं है, यह वक्त के साथ अपने आप ठीक होता है। इसके इलाज के लिए ये तरीके अपनाए जाते हैं;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।