
Gout Symptoms in Hindi: रात को सोते समय सब कुछ सामान्य था, लेकिन सुबह उठते ही पैर के अंगूठे में इतना तेज दर्द होने लगा कि चलना-फिरना मुश्किल हो गया। कई लोग इस तरह की परेशानी को मोच, थकान या सामान्य सूजन समझ लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह गाउट (Gout) नाम की एक प्रकार की गठिया (Arthritis) का संकेत हो सकता है।
मेयो क्लिनिक, NIH (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थराइटिस एंड मस्कुलोस्केलेटल एंड स्किन डिजीजेज), क्लीवलैंड क्लिनिक और NHS के अनुसार गाउट तब होता है जब शरीर में यूरिक एसिड (Uric Acid) का स्तर बढ़ जाता है और इसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं। इससे अचानक तेज दर्द, सूजन और लालिमा हो सकती है।
गाउट गठिया का एक आम प्रकार है, जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि पुरुषों और बढ़ती उम्र के लोगों में इसका खतरा अधिक माना जाता है। जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक बनता है या किडनी उसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो इसके छोटे-छोटे क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं। यही क्रिस्टल दर्द और सूजन का कारण बनते हैं।
Mayo Clinic के अनुसार गाउट का सबसे आम असर पैर के बड़े अंगूठे (Big Toe) पर देखा जाता है। कई मरीजों में पहला अटैक रात के समय होता है। शरीर के इस हिस्से का तापमान अपेक्षाकृत कम होने के कारण यूरिक एसिड क्रिस्टल यहां आसानी से जमा हो सकते हैं।
गाउट का दर्द अक्सर अचानक शुरू होता है और कई बार रात में व्यक्ति की नींद तक खोल सकता है।
अंगूठा लाल, गर्म और सूजा हुआ दिखाई दे सकता है।
कुछ लोगों में चादर या कपड़े का हल्का स्पर्श भी दर्द बढ़ा सकता है।
प्रभावित जोड़ सामान्य से अधिक गर्म महसूस हो सकता है।
दर्द और सूजन के कारण रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो सकता है।
यदि इलाज न कराया जाए तो समय के साथ गाउट के अटैक बार-बार हो सकते हैं।
NIH और Cleveland Clinic के अनुसार कुछ कारक गाउट का खतरा बढ़ा सकते हैं:
NHS के अनुसार गाउट टखनों, घुटनों, कोहनियों, कलाई और उंगलियों के जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।
अगर अचानक किसी जोड़ में तेज दर्द, सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से जोड़ों को होने वाले लंबे नुकसान से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।