
Routine Screenings Hindi: हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि जब तक शरीर में कोई बड़ी तकलीफ न हो, कोई दर्द न उठे, हम डॉक्टर के पास जाने का सोचते भी नहीं हैं। हम सोचते हैं जब सब ठीक चल रहा है, तो फालतू में डॉक्टर के चक्कर क्यों काटना?
लेकिन जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन का कहना है कि यह सोच बिल्कुल गलत है। असली समझदारी बीमारी होने का इंतज़ार करने में नहीं, बल्कि उसे समय से पहले पकड़ने में है। और यही काम करती है Routine Screening (नियमित जांच)। आइए समझते हैं कि ये रूटीन टेस्ट क्या होते हैं और ये आपके लिए क्यों जरूरी हैं।
सीडीसी के अनुसार, स्क्रीनिंग टेस्ट असल में शरीर की एक ऐसी जांच है, जिससे बीमारियों का तब पता चल जाता है जब उनके कोई लक्षण भी नहीं दिखते। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बीमारी की शुरुआत में ही पकड़ हो जाने से उसका इलाज करना बेहद आसान हो जाता है। रूटीन स्क्रीनिंग आप तब करवाते हैं जब आप पूरी तरह से ठीक महसूस कर रहे होते हैं और आपके शरीर में बीमारी का कोई लक्षण नहीं होता। ये टेस्ट्स इसलिए किए जाते हैं ताकि अगर शरीर के अंदर कोई बीमारी चुपचाप पनप रही हो, तो उसका शुरुआती स्टेज में ही पता चल सके।
1. शुरुआत में ही बीमारी पकड़ना- कैंसर, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियां शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखातीं। जब तक दर्द या तकलीफ शुरू होती है, तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। स्क्रीनिंग से इन्हें बहुत पहले पकड़ा जा सकता है।
2. इलाज होता है बेहद आसान- अगर कोई बीमारी शुरुआती स्टेज में मिल जाती है, तो उसे दवाओं या लाइफस्टाइल में बदलाव करके आसानी से ठीक किया जा सकता है।
3. जान बचाना और पैसे की बचत- आखिरी स्टेज में इलाज कराने पर जान का खतरा तो रहता ही है, साथ ही लाखों रुपये भी खर्च हो जाते हैं। समय पर जांच कराने से आप दोनों चीजों से बच जाते हैं।
यूनाइटेड हेल्थकेयर (UnitedHealthcare) के अनुसार, बुजुर्गों को ये 8 मेडिकल टेस्ट करवाते रहना चाहिए;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।