
Nipah Virus Kerala: केरल में साल 2026 का पहला निपाह वायरस (Nipah Virus) मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है। कोझिकोड के 43 वर्षीय मरीज की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज वेंटिलेटर सपोर्ट पर किया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संपर्क में आए लोगों की पहचान कर निगरानी शुरू कर दी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरीज के संपर्क में आए 77 लोगों की पहचान की गई है। इनमें 58 स्वास्थ्यकर्मी, 14 परिवार के सदस्य और 5 दोस्त या सहकर्मी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि अब तक इनमें से किसी में भी निपाह संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, दो लोगों को सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है, जबकि 13 लोग हाई-रिस्क कैटेगरी में हैं। इन सभी को एहतियातन क्वारंटीन किया गया है।
मरीज को कुछ दिन पहले बुखार और अन्य सामान्य लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन बाद में उसमें दिमागी सूजन (Encephalitis) जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। मरीज को याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी होने लगी थीं। इसी वजह से डॉक्टरों को निपाह वायरस की आशंका हुई और जांच कराई गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हो गई। समय रहते जांच कराने का फैसला मरीज में संक्रमण की पहचान का सबसे बड़ा कारण बना।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि मरीज को संक्रमण कहां से हुआ। शुरुआती जांच में पता चला है कि बीमारी शुरू होने से कुछ समय पहले मरीज ने एक गोदाम (वेयरहाउस) की सफाई की थी। यह गोदाम एक ऐसे इलाके के पास था जहां चमगादड़ों (Bats) की मौजूदगी की जानकारी मिली है। निपाह वायरस को लेकर WHO और CDC दोनों बताते हैं कि फल खाने वाले चमगादड़ (Fruit Bats) इस वायरस के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। संक्रमित चमगादड़ों के संपर्क में आने वाले भोजन, फलों या सतहों से भी संक्रमण फैल सकता है।
CDC के अनुसार, निपाह वायरस एक गंभीर जूनोटिक संक्रमण है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, भ्रम, याददाश्त की समस्या और गंभीर मामलों में दिमागी सूजन शामिल हो सकती है। कुछ मरीजों में यह संक्रमण तेजी से बढ़कर कोमा और मौत का कारण भी बन सकता है। यही वजह है कि निपाह के मामलों को स्वास्थ्य एजेंसियां बेहद गंभीरता से लेती हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और संपर्क में आए लोगों की निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी तरह के तेज बुखार, असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क के बाद बीमारी के संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। केरल पहले भी निपाह वायरस के मामलों का सफलतापूर्वक सामना कर चुका है। इस बार भी स्वास्थ्य विभाग का फोकस संक्रमण के स्रोत का पता लगाने और संभावित फैलाव को रोकने पर है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।