स्वास्थ्य

40% लोगों में पाई गई हड्डियों की साइलेंट बीमारी, बढ़ सकता है फ्रैक्चर का खतरा, ऑर्थोपेडिक ने बताए इसके शुरुआती संकेत

Osteopenia Symptoms: नई रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर में 40% लोग ऑस्टियोपीनिया यानी हड्डियों की साइलेंट बीमारी से प्रभावित हैं। जानिए इसके शुरुआती संकेत, कारण और बचाव के तरीके।

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May 15, 2026
कमजोर होती हड्डियों को बयां करती सांकेतिक तस्वीर (photo- freepik)

Osteopenia Symptoms: आजकल हड्डियों का कमजोर होना सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। खराब लाइफस्टाइल, पोषण की कमी और फिजिकल एक्टिविटी कम होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग ऑस्टियोपीनिया नाम की एक साइलेंट बीमारी का शिकार हो रहे हैं।

साइंस अलर्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 40% वयस्कों में यह समस्या पाई जा रही है।

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रिसर्च की मानें तो ऑस्टियोपीनिया (Osteopenia) ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) में बदल सकती है, जिससे मामूली चोट में भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या है ऑस्टियोपीनिया?

हमारी हड्डियां लगातार टूटती और दोबारा बनती रहती हैं। कम उम्र में यह प्रक्रिया बैलेंस रहती है, लेकिन 30 साल के बाद धीरे-धीरे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है।

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक, “ऑस्टियोपीनिया को लोग अक्सर सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह भविष्य में गंभीर बोन डिजीज का संकेत हो सकता है।” रिसर्च के अनुसार मेनोपॉज (Menopause) के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन (Estrogen) कम होने लगता है, जिससे हड्डियां तेजी से कमजोर हो सकती हैं। यही वजह है कि 50 साल से ऊपर की हर दूसरी महिला में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

किन लोगों में ज्यादा खतरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक इन लोगों में ऑस्टियोपीनिया का खतरा ज्यादा होता है-

  • 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग
  • धूम्रपान (Smoking) और शराब (Alcohol) लेने वाले लोग
  • कैल्शियम और विटामिन D की कमी वाले लोग
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले मरीज
  • फिजिकल एक्टिविटी कम करने वाले लोग

शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें

ऑस्टियोपीनिया को साइलेंट बोन डिजीज कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में इसके साफ लक्षण नहीं दिखते। लेकिन कुछ संकेत शरीर पहले से देने लगता है-

  • हल्की चोट में भी हड्डी टूटना
  • पीठ या कमर दर्द
  • कमजोरी और थकान
  • शरीर का झुकना
  • लंबे समय तक हड्डियों में दर्द

डॉ. शर्मा बताते हैं कि कई लोगों को इस बीमारी का पता तब चलता है, जब पहली बार फ्रैक्चर हो जाता है।

कैसे पता चलती है बीमारी?

हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए डीएक्सए स्कैन किया जाता है। इसमें बोन मिनरल डेंसिटी (Bone Mineral Density - BMD) यानी हड्डियों का घनत्व मापा जाता है। अगर T-score -1 से -2.5 के बीच आता है, तो उसे ऑस्टियोपीनिया माना जाता है।

कैसे रखें हड्डियों को मजबूत?

डॉक्टरों के अनुसार;

  • रोजाना वॉक और एक्सरसाइज करें
  • कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर डाइट लें
  • धूप में समय बिताएं
  • धूम्रपान और शराब से दूरी रखें
  • वजन कंट्रोल में रखें

रिसर्चर्स का कहना है कि समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर हड्डियों को कमजोर होने से काफी हद तक बचाया जा सकता है और भविष्य में फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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Published on:
15 May 2026 01:08 pm
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