स्वास्थ्य

Peripheral Smear Test क्या है? खून की कोशिकाओं को देखकर कैसे पता चलती हैं कई बीमारियां, रिसर्च से समझिए

Peripheral Smear Test में खून की कोशिकाओं को माइक्रोस्कोप से देखा जाता है। जानिए यह टेस्ट एनीमिया, संक्रमण और ब्लड कैंसर जैसी बीमारियों का पता कैसे लगाता है।
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Jun 25, 2026
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रक्त कोशिकाएं और Peripheral Smear Test की जांच को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

Peripheral Smear Test: जब डॉक्टर किसी मरीज को बार-बार थकान, कमजोरी, बुखार या खून की कमी की शिकायत पर जांच कराने की सलाह देते हैं, तो अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ हीमोग्लोबिन की रिपोर्ट देखकर सब कुछ पता चल जाएगा। लेकिन कई बार डॉक्टर एक खास जांच करवाने को कहते हैं, जिसे पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट कहा जाता है। यह टेस्ट सिर्फ यह नहीं बताता कि खून में कितनी कोशिकाएं हैं, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे दिखने में कैसी हैं। कई बार खून की कोशिकाओं के आकार, रंग और बनावट में हुए छोटे-छोटे बदलाव भी गंभीर बीमारियों का संकेत दे सकते हैं।

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ हेमेटोलॉजी, मेडलाइनप्लस और एनसीबीआई की जानकारी के अनुसार, पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट खून से जुड़ी कई समस्याओं की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट क्या है?

पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट एक प्रयोगशाला जांच है, जिसमें खून की एक छोटी बूंद को कांच की स्लाइड पर फैलाकर माइक्रोस्कोप से देखा जाता है। इस जांच में डॉक्टर और लैब विशेषज्ञ लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या के साथ-साथ उनके आकार और संरचना का भी अध्ययन करते हैं। यही कारण है कि इसे कई बार खून की कोशिकाओं की तस्वीर भी कहा जाता है।

इस टेस्ट में क्या देखा जाता है?

लाल रक्त कोशिकाएं- ये कोशिकाएं शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। यदि इनका आकार असामान्य हो, बहुत छोटा या बहुत बड़ा हो, तो यह एनीमिया, विटामिन बी12 की कमी या अन्य रक्त विकारों का संकेत हो सकता है।

सफेद रक्त कोशिकाएं- ये शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करती हैं। यदि इनकी संख्या या स्वरूप असामान्य हो, तो संक्रमण, सूजन या रक्त कैंसर जैसी स्थितियों की आशंका हो सकती है।

प्लेटलेट्स- प्लेटलेट्स खून को जमाने में मदद करते हैं। इनकी संख्या कम या अधिक होना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।

किन बीमारियों का पता चल सकता है?

मेडलाइनप्लस और एनसीबीआई के अनुसार, पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट की मदद से कई स्थितियों की पहचान में सहायता मिल सकती है:

  • एनीमिया के विभिन्न प्रकार
  • आयरन की कमी
  • विटामिन बी12 और फोलेट की कमी
  • रक्त संक्रमण
  • मलेरिया जैसे परजीवी संक्रमण
  • ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर)
  • सिकल सेल रोग
  • थैलेसीमिया
  • प्लेटलेट्स से जुड़ी समस्याएं

यह टेस्ट अक्सर अन्य ब्लड टेस्ट के साथ मिलाकर किया जाता है ताकि बीमारी की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

डॉक्टर यह जांच कब लिखते हैं?

NIH यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट की सलाह दे सकते हैं:

  • लगातार थकान
  • बार-बार बुखार
  • कमजोरी
  • चक्कर आना
  • त्वचा का पीला पड़ना
  • बार-बार संक्रमण होना
  • शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना

क्या यह टेस्ट दर्दनाक होता है?

इस जांच के लिए केवल सामान्य ब्लड सैंपल लिया जाता है। जिस तरह अन्य रक्त जांच के लिए खून लिया जाता है, उसी तरह इस टेस्ट के लिए भी सैंपल लिया जाता है। इसमें किसी विशेष तैयारी की भी जरूरत नहीं होती, हालांकि डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार कुछ निर्देश दे सकते हैं।

केवल संख्या नहीं, कोशिकाओं का स्वरूप भी बताता है बहुत कुछ

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ हेमेटोलॉजी के अनुसार, कभी-कभी रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य हो सकती है, लेकिन उनका आकार या बनावट असामान्य हो सकती है। ऐसे मामलों में पेरिफेरल स्मीयर टेस्ट महत्वपूर्ण जानकारी देता है, जो सामान्य रक्त गणना जांच में दिखाई नहीं देती। यही वजह है कि कई रक्त रोगों की पुष्टि में यह जांच आज भी बेहद उपयोगी मानी जाती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Published on:
25 Jun 2026 11:05 am