
Newborn Jaundice Symptoms: मशहूर अभिनेत्री और व्लॉगर संभावना सेठ (Sambhavna Seth) अपने जुड़वां बच्चों के नियमित चेकअप और पीलिया (जॉन्डिस) की जांच के लिए डॉक्टर के पास गईं। वे बच्चों के जॉन्डिस लेवल और अगले वैक्सीनेशन को लेकर थोड़े चिंतित थे। हालांकि, डॉक्टर ने दोनों बच्चों की जांच के बाद उन्हें पूरी तरह फिट और स्वस्थ घोषित किया।
डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों को किसी भी तरह के जॉन्डिस टेस्ट की जरूरत नहीं है। बस नियमित सनबाथ और उचित पोषण से वे बिल्कुल ठीक रहेंगे। ऐसी बात सुनकर कई नए माता-पिता राहत की सांस लेते हैं। दरअसल, नवजात शिशुओं में पीलिया होना काफी आम है। ज्यादातर मामलों में यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती, बल्कि जन्म के बाद शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों का हिस्सा होता है।
Mayo Clinic की रिपोर्ट के अनुसार पीलिया तब होता है जब बच्चे के खून में बिलीरुबिन (Bilirubin) नामक पीला पदार्थ बढ़ जाता है। जन्म के बाद बच्चे का लिवर पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वह इस पदार्थ को तेजी से शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता। नतीजतन त्वचा और आंखों में पीलापन दिखने लगता है। लगभग 60% फुल-टर्म और 80% प्रीमैच्योर बच्चों में जन्म के शुरुआती दिनों में पीलिया देखा जा सकता है।
आमतौर पर पीलापन सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है और बाद में शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकता है।
आप अपने बच्चे को बार-बार दूध पिलाएं। स्तनपान से बच्चे की पॉटी और पेशाब बढ़ती है, जिससे अतिरिक्त बिलीरुबिन शरीर से बाहर निकलने में मदद मिलती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप कराएं। यदि डॉक्टर ने दोबारा जांच के लिए बुलाया है तो उसे नजरअंदाज न करें। अगर बच्चा अच्छी तरह दूध पी रहा है, सामान्य रूप से सो रहा है और एक्टिव है, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। कई डॉक्टर सुबह की हल्की धूप की सलाह देते हैं, लेकिन यह हर बच्चे के लिए जरूरी नहीं होता। इसलिए पहले विशेषज्ञ की राय लें।
अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था American Academy of Pediatrics और Mayo Clinic के अनुसार नवजात शिशुओं में होने वाला अधिकांश पीलिया सामान्य होता है और सही निगरानी व समय पर जांच से बिना किसी जटिलता के ठीक हो जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।