Cardiac Arrest After Accident: एक्सीडेंट या गंभीर चोट के बाद दिल क्यों रुक जाता है? जानिए कार्डियक अरेस्ट के कारण, लक्षण और बचाव के आसान तरीके।
Sudden Cardiac Arrest Causes: मलयालम एक्टर Santhosh Nair की आज सुबह केरल के अदूर में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 65 वर्षीय नायर को दिल का दौरा पड़ गया। तो आइए जानते हैं कि कैसे एक सामान्य सा लगने वाला हादसा (ट्रॉमा) कुछ ही मिनटों में जानलेवा Cardiac Arrest में बदल सकता है। अक्सर लोग मानते हैं कि एक्सीडेंट में सिर्फ चोट लगती है, लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार यही चोट शरीर के अंदर ऐसी गंभीर स्थिति बना देती है, जिससे दिल अचानक काम करना बंद कर देता है, यानी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।
mayoclinic की एक रिर्सच की मुताबिक जब शरीर को जोरदार चोट लगती है, जैसे सड़क हादसा, गिरना या सिर पर चोट, उसे मेडिकल भाषा में ट्रॉमा कहते हैं। यह सिर्फ बाहर से दिखने वाली चोट नहीं होती, बल्कि अंदरूनी अंगों पर भी असर डालती है। ध्यान देने वाली बात ये है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट अलग होते हैं। हार्ट अटैक ब्लॉकेज की वजह से होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होने से होता है। लेकिन गंभीर चोट दोनों को ट्रिगर कर सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, ट्रॉमा के बाद ये चीजें जानलेवा बन सकती हैं:
अगर शरीर से बहुत ज्यादा खून निकल जाए, तो दिल और दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिलती। इससे दिल अचानक बंद हो सकता है।
दिमाग दिल की धड़कन और सांस को कंट्रोल करता है। सिर पर चोट लगने से ये कंट्रोल सिस्टम गड़बड़ा सकता है।
फेफड़ों या सांस की नली में चोट लगने से शरीर में ऑक्सीजन कम पहुंचती है, जिससे दिल पर सीधा असर पड़ता है।
हादसे के बाद शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जो दिल की धड़कन को असामान्य बना सकते हैं।
अगर किसी को पहले से हार्ट प्रॉब्लम है, तो ट्रॉमा उसे और ज्यादा खतरनाक बना देता है।
हादसे के बाद अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं:
ये संकेत बताते हैं कि हालत गंभीर हो रही है।
कार्डियक अरेस्ट में हर मिनट बहुत कीमती होता है। अगर तुरंत CPR और इलाज न मिले, तो जान बचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हादसे के बाद “ठीक लग रहा है” सोचकर बैठना खतरनाक हो सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।