
Stretch Marks After Pregnancy Hindi: मां बनना हर महिला की जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार अहसास होता है। जब नन्हा मेहमान गोद में आता है, तो घर खुशियों से भर जाता है। लेकिन बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में भी कई तरह के बदलाव आते हैं जैसे पेट, कमर, जांघों या ब्रेस्ट्स पर खिंचाव के हल्के-गहरे निशान पड़ जाना। इन्हें ही हम स्ट्रैच मार्क्स (Stretch Marks) कहते हैं। कई महिलाएं डिलीवरी के बाद इन निशानों को देखकर थोड़ी उदास या परेशान हो जाती हैं और सोचती हैं कि क्या यह कभी ठीक होंगे भी या नहीं? अगर आपके मन में भी यही सवाल घूम रहे हैं, तो आइए समझते हैं कि ये निशान क्यों पड़ते हैं और इनसे जुड़ी बात।
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) की रिपोर्ट बताती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान जैसे-जैसे पेट के अंदर आपका बच्चा बड़ा होता है, वैसे-वैसे पेट की त्वचा बहुत तेजी से फैलती है। हमारी त्वचा के अंदर कोलाजन (Collagen) और इलास्टिन (Elastin) नाम के दो बहुत ज़रूरी प्रोटीन होते हैं। ये प्रोटीन हमारी त्वचा को रबड़ की तरह लचीला और मजबूत बनाते हैं। जब प्रेग्नेंसी में पेट और शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है, तो त्वचा की अंदरूनी परत (Dermis) इस तेज खिंचाव को पूरी तरह सहन नहीं कर पाती। इसकी वजह से त्वचा के अंदर के बारीक रेशे (fibers) हल्के से टूटने या फटने लगते हैं। यही अंदरूनी खिंचाव बाहर त्वचा पर लंबी-लंबी रेखाओं या निशानों के रूप में दिखाई देता है। इसके अलावा, गर्भावस्था में शरीर के हार्मोन्स में भी बहुत तेजी से बदलाव आते हैं, जो त्वचा का प्राकृतिक लचीलापन थोड़ा कम कर देते हैं।
हेल्थलाइन के अनुसार, जब स्ट्रैच मार्क्स नए-नए बनते हैं, तब इनका रंग थोड़ा गहरा होता है जैसे लाल, गुलाबी, बैंगनी या गहरा भूरा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि त्वचा की जिस परत में खिंचाव आया होता है, उसके ठीक नीचे मौजूद पतली-पतली खून की नसें (blood vessels) ऊपर से झलकने लगती हैं। शुरुआती कुछ महीनों में इन निशानों वाली जगह पर हल्की खुजली होना, सूखापन महसूस होना या खिंचाव होना बहुत आम बात है।
यह सबसे बड़ा और अहम सवाल है जो हर नई मां के मन में आता है। स्ट्रैच मार्क्स त्वचा पर बना एक तरह का अंदरूनी घाव या निशान (scar) होता है। इसलिए ये कभी भी पूरी तरह मिटते नहीं हैं। डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे (लगभग 6 से 12 महीनों के भीतर) त्वचा की वो रंगीन खून की नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसके साथ ही इन निशानों का लाल या बैंगनी रंग फीका पड़ने लगता है। समय बीतने के साथ ये निशान आपकी त्वचा के रंग जैसे, हल्के सिल्वर या सफेद रंग में बदल जाते हैं और काफी धुंधले हो जाते हैं। दूर से देखने पर ये आसानी से नजर भी नहीं आते।
अगर आप चाहती हैं कि आपकी त्वचा स्वस्थ रहे और ये निशान जल्दी हल्के पड़ें, तो इन आसान बातों को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।