
Toxic Fumes in Fire: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड में 15 बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। पहली नजर में लोगों को लगा कि बच्चों की मौत आग की लपटों में जलने से हुई होगी। लेकिन जब डॉक्टरों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की जानकारी सामने आई, तो एक चौंकाने वाली बात पता चली, अधिकांश बच्चों की मौत जलने से नहीं, बल्कि धुएं और जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से हुई।
जब किसी इमारत में आग लगती है, तो सिर्फ लकड़ी या कागज ही नहीं जलते। आज की इमारतों में मौजूद प्लास्टिक, फोम, सिंथेटिक फर्नीचर, वायरिंग और अन्य रासायनिक पदार्थ भी जलते हैं। इनके जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सायनाइड और कई जहरीली गैसें निकलती हैं, जो शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोक सकती हैं। बंद इमारतों, घरों, अस्पतालों और व्यावसायिक परिसरों में लगी आग के दौरान धुआं और जहरीली गैसें कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती हैं।
World Health Organization (WHO) और Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार आग लगने पर सिर्फ लकड़ी ही नहीं जलती, बल्कि प्लास्टिक, फोम, सिंथेटिक कपड़े, पेंट और अन्य रसायन भी जलते हैं। इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। इनमें शामिल हैं:
ये गैसें शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाधित कर सकती हैं।
CDC के अनुसार कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसे Silent Killer भी कहा जाता है। जब यह गैस शरीर में पहुंचती है, तो खून में मौजूद हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है और ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। नतीजा यह होता है कि मस्तिष्क, दिल और अन्य अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके लक्षण हो सकते हैं:
गंभीर मामलों में कुछ ही मिनटों में मौत भी हो सकती है।
आग से निकलने वाला धुआं सीधे श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। National Institutes of Health (NIH) के अनुसार Smoke Inhalation Injury आग से जुड़ी मौतों का एक प्रमुख कारण है। धुएं के संपर्क में आने पर:
यही कारण है कि कई मरीज आग से बच जाने के बाद भी ICU तक पहुंच जाते हैं।
NIH और फायर सेफ्टी विशेषज्ञ सलाह देते हैं:
अगर आग या धुएं के संपर्क के बाद ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।