
Blood Donation: दुनिया में लाखों लोगों को एक्सीडेंट, ऑपरेशन या बीमारियों के इलाज के लिए खून की जरूरत पड़ती है। खून का कोई दूसरा विकल्प या फैक्ट्री नहीं होती, इसे सिर्फ एक इंसान ही दूसरे इंसान को दे सकता है। इसलिए आपका एक बार का रक्तदान किसी की जान बचा सकता है। लेकिन अब सवाल ये है कि रक्तदान कितने प्रकार होता है? कौन रक्तदान कर सकता है और कौन नहीं इसके अलावा रतक्दान से पहले की तैयारी इन सभी सवालों के जवाब जानिए मेयो क्लिनिक और WHO की गाइडलाइंस से।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, खून अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से दिया जाता है;
1. पूरा खून देना (Whole Blood Donation)- यह सबसे आम तरीका है। इसमें आपके शरीर से सीधे लगभग आधा लीटर पूरा खून लिया जाता है। इसे या तो सीधे मरीज को चढ़ाते हैं या लैब में इसके अलग-अलग हिस्से करके मरीजों को दिए जाते हैं।
2. एफेरेसिस ब्लड डोनेशन- एफेरेसिस (Apheresis) असल में रक्तदान करने का एक खास तरीका है। इसमें आपके शरीर से पूरा खून नहीं लिया जाता, बल्कि खून का सिर्फ वही हिस्सा निकाला जाता है जिसकी मरीज को जरूरत होती है। इसमें निम्न प्रकार शामिल हैं;
अगर आप खून देना चाहते हैं, तो आप पूरी तरह फिट हों। उस दिन आपको सर्दी, खांसी, बुखार या पेट खराब जैसी कोई दिक्कत न हो। आपकी उम्र कम से कम 16 या 17 साल होनी चाहिए। आपका वजन कम से कम 50 किलो होना चाहिए। खून देने से पहले डॉक्टर आपका टेस्ट करेंगे और सेहत से जुड़े कुछ सवाल पूछेंगे, उसमें पास होना जरूरी है।
WHO के अनुसार, आपको निम्न स्थिति में रक्तदान से बचना चाहिए;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।