
White Coat Hypertension Hindi: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि घर पर ब्लड प्रेशर (BP) बिल्कुल ठीक आता है, लेकिन जैसे ही अस्पताल या डॉक्टर के क्लिनिक में चेक कराया जाता है, मशीन हाई BP दिखा देती है? अगर हां, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा कई लोगों के साथ होता है। इस परेशानी को व्हाइट कोट हाइपरटेंशन (White Coat Hypertension) या व्हाइट कोट सिंड्रोम कहा जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की रिसर्च, मेयो क्लिनिक व क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, अस्पताल का माहौल, घबराहट या तनाव कुछ लोगों का BP कुछ समय के लिए बढ़ा सकता है। हालांकि इसे हल्के में लेना भी सही नहीं है, क्योंकि कुछ लोगों में आगे चलकर सचमुच हाई BP की समस्या हो सकती है।
जब अस्पताल या डॉक्टर के सामने BP बढ़ा हुआ आए, लेकिन घर पर वही BP सामान्य रहे, तो उसे व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहते हैं। यानी अस्पताल की रीडिंग और घर की रीडिंग में फर्क दिखता है। इसलिए सिर्फ एक बार अस्पताल में हाई BP आने का मतलब यह नहीं कि आपको हमेशा के लिए हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है।
कई लोगों को अस्पताल जाते ही घबराहट होने लगती है। किसी को बीमारी की चिंता रहती है, कोई रिपोर्ट को लेकर परेशान रहता है तो कोई डॉक्टर के सामने ही नर्वस हो जाता है। जब ऐसा होता है तो शरीर तनाव महसूस करता है और कुछ देर के लिए BP बढ़ सकता है। यही वजह है कि अस्पताल में रीडिंग ज्यादा आती है, लेकिन घर पहुंचकर वही BP सामान्य हो जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, यह परेशानी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी संभावना ज्यादा रहती है।
नहीं। अगर घर पर BP सामान्य है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको कोई चिंता ही नहीं करनी चाहिए। AHA की रिसर्च बताती है कि व्हाइट कोट हाइपरटेंशन वाले कुछ लोगों में आगे चलकर असली हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर BP चेक कराते रहना जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।