
World Stroke Day: क्या आपके घर में कभी ऐसा हुआ है कि बैठे-बठे किसी अपने की जुबान अचानक लड़खड़ाने लगे, उसका चेहरा एक तरफ को झुक जाए या हाथ-पैर काम करना बंद कर दें? हम अक्सर इसे मामूली कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और यही सबसे बड़ी भूल साबित होती है। मेडिकल इमरजेंसी की भाषा में कहें तो यह ब्रेन स्ट्रोक का साफ इशारा है। विश्व स्ट्रोक दिवस 29 अक्टूबर मनाया जाता है। वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन (World Stroke Organization) की इस साल की थीम साफ कहती है एवरी मिनट काउंट्स (Every M1nute Counts), यानी स्ट्रोक के मामले में एक-एक सेकंड बहुत कीमती होता है। आइए जानते हैं कि स्ट्रोक क्या है और FAST फॉर्मूला क्या है?
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, जब हमारे दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है या ब्रेन की कोई नस फट जाती है, तब स्ट्रोक पड़ता है। हमारे दिमाग की कोशिकाओं (Brain Cells) को जिंदा रहने के लिए लगातार ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई की जरूरत होती है। जैसे ही खून का बहाव थमता है, दिमाग की कोशिकाएं तेजी से मरने लगती हैं। इलाज में देरी होने पर हर मिनट लाखों ब्रेन सेल्स डैमेज हो जाते हैं। इसलिए स्ट्रोक आने पर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो मरीज की जान और विकलांगता दोनों को बचाया जा सकता है। इसके लिए FAST फॉर्मूला बेहद कारगर है;
स्ट्रोक के बाद के शुरुआती 3 से 4.5 घंटे का समय गोल्डन ऑवर (Golden Hour) कहलाता है। इस समय के भीतर अगर मरीज अस्पताल पहुंच जाए, तो डॉक्टर खून के थक्के को गलाने वाली दवाएं (Thrombolysis) या प्रोसीजर के जरिए खून का बहाव दोबारा शुरू कर सकते हैं। कई लोग इस उम्मीद में घर पर बैठकर इंतजार करते हैं कि शायद कमजोरी अपने आप ठीक हो जाएगी, लेकिन यह देरी मरीज को हमेशा के लिए बिस्तर पर ला सकती है या जानलेवा साबित हो सकती है।
याद रखें, अगर किसी को स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो उसे भूलकर भी घरेलू नुस्खे न दें, न ही पानी या कोई दवा पिलाएं। तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और सिगरेट-शराब की आदतें स्ट्रोक के मुख्य दुश्मन हैं। अपनी सेहत को हल्के में न लें, क्योंकि स्ट्रोक किसी भी उम्र में आ सकता है और बचाव का एकमात्र रास्ता सतर्कता है।