जगदलपुर

अब इन वाहन मालिकों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, बस्तर में ANPR कैमरों से होगी निगरानी

Chhattisgarh Vehicle News: सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध बीमा सड़कों पर चल रहे वाहनों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
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Aug 08, 2026
Petrol Diesel
बीमा नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं! (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Petrol-Diesel Rule: यदि आपके दोपहिया या चारपहिया वाहन का थर्ड-पार्टी बीमा (इंश्योरेंस) समाप्त हो गया है तो अब इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध बीमा के सडक़ों पर दौड़ रहे वाहनों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भविष्य में बिना थर्ड-पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इस फैसले का असर बस्तर के हजारो वाहन मालिकों पर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना अनिवार्य बीमा के चल रहे हैं। इससे सडक़ दुर्घटनाओं में घायल या मृतकों के परिजनों को समय पर मुआवजा मिलने में परेशानी होती है। अदालत ने सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बीमा नियामक आईआरडीएआई को ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे वाहन के बीमा की पुष्टि होने के बाद ही ईंधन उपलब्ध कराया जा सके। अदालत ने ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों के उपयोग का सुझाव दिया है। इन कैमरों को वाहन और बीमा संबंधी डाटाबेस से जोडक़र बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान की जाएगी।

देश में 56 फीसदी वाहन बिना बीमा

संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति (2024-25) की रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से करीब 16.54 करोड़ वाहन (56 प्रतिशत) बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत प्रत्येक वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है।

Petrol-Diesel Rule: बस्तर में असर

बस्तर जिले में हजारों दोपहिया, कार, ट्रैक्टर, ऑटो और व्यावसायिक वाहन संचालित होते हैं। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो जिन वाहन मालिकों ने समय पर बीमा का नवीनीकरण नहीं कराया होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही पुलिस जांच के दौरान भी ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए समय पर थर्ड-पार्टी बीमा का नवीनीकरण कराना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो जाएगा।

क्या है थर्ड-पार्टी बीमा

  • सड़क दुर्घटना में दूसरे व्यक्ति, वाहन या संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करता है।
  • मोटर वाहन अधिनियम के तहत सभी मोटर वाहनों के लिए अनिवार्य।
  • बिना वैध बीमा वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है।

मौके पर जांच होगी

राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल ऐप और हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिनसे किसी भी वाहन का बीमा मौके पर ही जांचा जा सकेगा। बीमा नहीं मिलने पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ तत्काल ई-चालान जारी किया जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • बिना बीमा वाले वाहनों को फ्यूल देने पर रोक के लिए पायलट प्रोजेक्ट।
  • एएनपीआर कैमरों से वाहन की स्वत: पहचान।
  • बीमा डाटाबेस से ऑनलाइन सत्यापन।
  • पुलिस को मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर जांच की सुविधा।
  • बिना बीमा वाले वाहनों पर ई-चालान।
  • नई कारों के लिए 4 वर्ष और नए दोपहिया वाहनों के लिए 6 वर्ष का अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा।
Updated on:
08 Aug 2026 03:57 pm
Published on:
08 Aug 2026 03:57 pm